चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बड़ा कदम
26 जून 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 345 पंजीकृत अमान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को डीलिस्ट करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह निर्णय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में लिया गया। ये वे दल हैं जो वर्ष 2019 से अब तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लिए और जिनके कार्यालयों का भौतिक पता नहीं मिल पाया है। ये दल देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं।
राजस्थान से 9 दल डीलिस्टिंग के लिए चुने गए
राजस्थान से डीलिस्टिंग के लिए चयनित 9 दलों में राजस्थान जनता पार्टी, राष्ट्रीय जन सागर पार्टी, खुशहाल किसान पार्टी, भारत वाहिनी पार्टी, भारतीय जन हितकारी पार्टी, नेशनल जनसत्ता पार्टी, नेशनलिस्ट पीपल्स फ्रंट, स्वच्छ भारत पार्टी एवं महाराणा क्रांति पार्टी शामिल हैं।
प्रक्रिया और कानूनी प्रावधान
चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी दल के साथ अनुचित व्यवहार न हो। इसलिए संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करें और सुनवाई का अवसर प्रदान करें। डीलिस्टिंग का अंतिम निर्णय आयोग द्वारा लिया जाएगा।
राजनीतिक दलों का पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत होता है। पंजीकृत दलों को कर छूट सहित कई सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन यदि कोई दल छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता या उसका भौतिक अस्तित्व नहीं होता, तो उसे डीलिस्ट किया जा सकता है।
अभियान का उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक प्रणाली की शुद्धि करना और निष्क्रिय, छद्म या गैर-मौजूद दलों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। वर्तमान में देश में 2800 से अधिक RUPPs पंजीकृत हैं, जिनमें से कई दल आवश्यक शर्तें पूरी नहीं कर रहे हैं। इसलिए आयोग ने इस राष्ट्रव्यापी समीक्षा अभियान की शुरुआत की है, जो आगे भी जारी रहेगा।
चुनाव आयोग की यह पहल भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए अहम है। डीलिस्टिंग की प्रक्रिया से न केवल चुनावी व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि वास्तविक और सक्रिय राजनीतिक दलों को ही चुनावी प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। राजस्थान सहित पूरे देश में यह कदम राजनीतिक प्रणाली को और अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह कार्रवाई लोकतंत्र की स्वच्छता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।



