भीनमाल/जालोर। (निकुल सिंह राव) जालोर जिले के भीनमाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोडिटा में पिछले महीने हुई सनसनीखेज लूट और हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। सुनसान ओरण में बकरियां चराने गए एक लाचार बुजुर्ग की बेरहमी से हत्या कर उनके जेवर लूटने की इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। पुलिस ने इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
वृत्ताधिकारी शंकरलाल मसूरिया के कुशल नेतृत्व में मिला न्याय
इस पूरी गुत्थी को सुलझाने और मुख्य आरोपी तक पहुँचने में वृत्ताधिकारी (CO) भीनमाल शंकरलाल मसूरिया की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। घटना की सूचना मिलते ही शंकरलाल मसूरिया ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और साक्ष्य संकलन के लिए एफएसएल (FSL) व एमओबी (MOB) टीमों को सक्रिय किया। शंकरलाल मसूरिया के ही रणनीतिक मार्गदर्शन में अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगालने से लेकर तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र को मजबूत करने तक का काम किया। उनके कड़े पर्यवेक्षण का ही परिणाम है कि एक माह के भीतर पुलिस ने मुख्य आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।

वारदात का खौफनाक मंजर: पगड़ी से बांधे हाथ-पैर, फिर पत्थर से किया हमला
यह पूरी घटना 9 दिसंबर 2025 की है। कोडिटा निवासी ओबाराम देवासी ने पुलिस को बताया था कि उनके 73 वर्षीय पिता रामाराम रोज की तरह कोडिटा ओरण में बकरियां चराने गए थे। दोपहर के समय जब वे वापस नहीं लौटे और ओबाराम वहां पहुँचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अज्ञात बदमाशों ने बुजुर्ग रामाराम को अकेला पाकर पहले उन्हें बातों में उलझाया और फिर उन पर पत्थरों से जानलेवा हमला कर दिया। क्रूरता की हद पार करते हुए बदमाशों ने बुजुर्ग के हाथ-पैर उन्हीं की पगड़ी से बांध दिए थे। बदमाश उनके कानों से सोने की मुर्कियां, हाथों से चांदी के कड़े, मोबाइल और पर्स छीनकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस ने इसे हत्या की धाराओं में दर्ज कर जांच शुरू की।
आरोपी का पूरा विवरण और अपराधिक इतिहास
पुलिस की सघन घेराबंदी और तकनीकी जांच के बाद मुख्य आरोपी को दबोचा गया, जिसकी पहचान निम्न रूप में हुई है:
- नाम: मानाराम उर्फ मोनिया
- पिता का नाम: अजाराम बागरी
- निवासी: धानसा, पुलिस थाना रामसीन, जिला जालोर।
- आपराधिक रिकॉर्ड: गिरफ्तार आरोपी मानाराम आदतन अपराधी है। इसके विरुद्ध पूर्व में भी जयपुर, उदयपुर और रामसीन जैसे शहरों में धोखाधड़ी और मारपीट के कुल 03 गंभीर प्रकरण दर्ज हैं। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपने साथी के साथ मिलकर लूट की नीयत से बुजुर्ग को निशाना बनाया था।

अस्पताल में प्रदर्शन और विधायक रतन देवासी की हुंकार
घटना के बाद जब बुजुर्ग रामाराम देवासी का शव भीनमाल सरकारी अस्पताल लाया गया, तो पूरे देवासी समाज में भारी आक्रोश फैल गया। इस दौरान रानीवाड़ा विधायक रतन देवासी ने समाज के लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर मोर्चा संभाला। विधायक ने प्रशासन पर सीधा दबाव बनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होती और मामले का खुलासा नहीं होता, समाज शांत नहीं बैठेगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से दो टूक शब्दों में जल्दी खुलासे की मांग की थी, जिसके बाद प्रशासन ने 7 दिन के भीतर मामले का पर्दाफाश करने का लिखित वादा समाज को दिया था।
डीवायएसपी शंकरलाल मसूरिया की ‘मिशन मोड’ में कार्रवाई
विधायक और समाज को दिए गए 7 दिन के भरोसे को कायम रखने की जिम्मेदारी वृत्ताधिकारी (DYSP) शंकरलाल मसूरिया के कंधों पर थी। मसूरिया ने इस केस को चुनौती के रूप में लिया और दिन-रात एक कर दिए। उन्होंने अलग-अलग टीमों का गठन किया, स्वयं फील्ड में रहकर साक्ष्य जुटाए और तकनीकी विश्लेषण के जरिए मुख्य आरोपी मानाराम उर्फ मोनिया तक पहुँचने में सफलता हासिल की। विधायक द्वारा तय की गई समय सीमा के भीतर अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाकर मसूरिया ने पुलिस की साख को मजबूत किया।
समाज ने जताया आभार
मामले का सफलतापूर्वक खुलासा होने और मुख्य आरोपी के पकड़े जाने पर देवासी समाज के प्रबुद्धजनों ने खुशी जाहिर की है। समाज ने इस न्याय की लड़ाई में साथ देने के लिए विधायक रतन देवासी और तत्परता से काम करने वाले वृत्ताधिकारी शंकरलाल मसूरिया सहित पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया है।
सफल टीम: जिन्होंने खोला हत्या का राज
इस सफल कार्यवाही को अंजाम देने वाली टीम में शंकरलाल मसूरिया (वृत्ताधिकारी, भीनमाल), राजेंद्र सिंह राजपुरोहित (निरीक्षक, थानाधिकारी भीनमाल), अरविंद कुमार (निरीक्षक, थानाधिकारी रामसीन), बलदेवराम (निरीक्षक, थानाधिकारी बागोड़ा), गनी मोहम्मद, रमेश कुमार, अमरसिंह, लाभुराम, गोपालसिंह, बाबूलाल, भरत कुमार, रतनाराम, मदनलाल, रामलाल, राकेश कुमार, दिनेश कुमार, भंयराम, राजेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, मायंगाराम, श्रवण कुमार, दिनेश कुमार, भजनलाल, दीपाराम, दिनेश कुमार, रमेश कुमार (चालक), मोहनलाल (चालक), जयंतिलाल, सुरेंद्र कासनिया, भेराराम, कृष्ण कुमार, जोगाराम, राकेश कुमार, गोपीलाल, मनोहरलाल (चालक) और त्रिलोकसिंह शामिल रहे। इन सभी अधिकारियों और जवानों की तत्परता से ही आरोपी की गिरफ्तारी संभव हो सकी।



