प्रवेशिका स्कूलों को क्रमोन्नत करने के बाद प्रधानाध्यापक पद किए समाप्त, आईएफएमएस पोर्टल पर तकनीकी पेच से अटका भुगतान
रानीवाड़ा | संस्कृत शिक्षा विभाग के नवीन आदेशों ने प्रदेशभर में कार्यरत प्रधानाध्यापकों और हजारों शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। कर्मचारी संगठनों ने विभाग के इस निर्णय को अव्यवहारिक बताते हुए कड़ा रोष व्यक्त किया है।
क्या है पूरा मामला?
संस्कृत शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2025 में एक आदेश जारी कर प्रदेश के सभी 225 प्रवेशिका विद्यालयों को वरिष्ठ उपाध्याय स्तर पर क्रमोन्नत कर दिया था। क्रमोन्नति के पश्चात इन विद्यालयों में पूर्व से सृजित ‘प्रधानाध्यापक’ के पदों को समाप्त कर ‘प्रधानाचार्य’ के नए पद सृजित किए गए।

वेतन आहरण में तकनीकी बाधा
संकट तब शुरू हुआ जब 30 दिसंबर 2025 को जारी एक नए आदेश के तहत IFMS पोर्टल पर ‘प्रधानाध्यापक प्रवेशिका’ के पदों को आहरित (Freeze) कर लिया गया। इसके परिणामस्वरूप, संबंधित विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के वेतन आहरण में तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि समाप्त किए गए कैडर का सामान्य शिक्षा विभाग की तर्ज पर समायोजन कर पदोन्नति दी जानी चाहिए थी, जो नहीं की गई।
आयकर और बैंक किस्तों की चिंता
इस अव्यवस्था के कारण फरवरी माह का वेतन बनना प्रभावित हो रहा है। चूंकि फरवरी के वेतन से ही आयकर (Income Tax) की गणना और कटौती होनी है, ऐसे में वेतन न मिलने से शिक्षकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। साथ ही, जिन कर्मचारियों ने व्यक्तिगत ऋण ले रखे हैं, उनकी बैंक किस्तों (EMI) के समय पर भुगतान न होने से उन पर अतिरिक्त ब्याज का भार पड़ने की आशंका है।
प्रशासनिक बोझ में बढ़ोतरी
विभाग ने इन विद्यालयों के डीडीओ (DDO) पावर भी छीनकर संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारियों को सौंप दिए हैं। इससे न केवल प्रधानाध्यापकों के विशेषाधिकार प्रभावित हुए हैं, बल्कि संभागीय अधिकारियों पर भी अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यभार बढ़ गया है, जिससे रोजमर्रा के अन्य कार्य बाधित हो रहे हैं।



