भंवरी देवी कांड के आरोपी बिश्नाराम का रहा मुख्य सहयोगी | MD ड्रग्स फैक्ट्री का मास्टरमाइंड और ‘मुख्य रसोइया’
जयपुर/कोलकाता। राजस्थान पुलिस की एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और एटीएस (ATS) की संयुक्त टीम ने एक बेहद साहसिक और फिल्मी अंदाज में चले ऑपरेशन ‘विषाणुबाहु’ के तहत राजस्थान के टॉप-10 वांछित अपराधियों में शामिल रमेश बिश्नोई को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से दबोच लिया है। एक लाख रुपये के इनामी इस शातिर अपराधी ने ड्रग्स की दुनिया में अपनी गहरी जड़ें जमा रखी थीं।
एटीएस महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार (IG Vikas Kumar) ने बताया कि आरोपी रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल (31) बाड़मेर के नेडी नाडी (धोरीमन्ना) का निवासी है, जिसे कोलकाता के न्यू टाउन इलाके से दबोचा गया।
सैकड़ों वाहन चोरी कर बना तस्करी की दुनिया का ‘बेताज बादशाह’
रमेश बिश्नोई के अपराध की शुरुआत 12वीं के बाद आवारागर्दी से हुई। उसने सबसे पहले लग्जरी गाड़ियों और पिकअप को निशाना बनाना शुरू किया। देखते ही देखते उसने सैकड़ों वाहन चोरी किए और उन्हें पश्चिमी राजस्थान के बड़े तस्करों को सप्लाई करना शुरू कर दिया। वाहन चोरी के इसी धंधे से उसने इतना पैसा कमाया कि वह खुद शराब तस्करी के बड़े कारोबार में कूद पड़ा। उसकी धमक राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक तक फैल गई।

भंवरी देवी कांड के आरोपी बिश्नाराम का रहा मुख्य सहयोगी
अपराध जगत में पैर जमाने के लिए रमेश ने बड़े गैंग्स का सहारा लिया। चर्चित भंवरी देवी हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार बिश्नाराम उसका सबसे करीबी साथी रहा है। रमेश ने बिश्नाराम के गैंग को चोरी की दर्जनों गाड़ियां, अवैध शराब के परिवहन और नशे के काले कारोबार के लिए संसाधन उपलब्ध कराए थे। काफी समय तक बिश्नाराम के दाहिने हाथ के रूप में काम करने के बाद, जब रमेश का नेटवर्क बड़ा हो गया, तो उसने अपना अलग गैंग बना लिया और स्वयं सरगना बन बैठा।
MD ड्रग्स फैक्ट्री का मास्टरमाइंड और ‘मुख्य रसोइया’
रमेश बिश्नोई केवल माल सप्लाई नहीं करता था, बल्कि वह राजस्थान में MD (मेफेड्रोन) ड्रग्स बनाने की फैक्ट्रियां स्थापित करने का मुख्य प्लानर था। हाल ही में राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पकड़ी गई फैक्ट्रियों का पूरा खाका इसी ने तैयार किया था:
- जोधपुर: कुड़ी भगतासनी इलाके में फैक्ट्री की पूरी मशीनरी और सेटअप रमेश ने ही लगवाया था।
- बाड़मेर: सेड़वा इलाके में पकड़ी गई फैक्ट्री का मुख्य सूत्रधार और कच्चा माल मुहैया कराने वाला यही था।
- सिरोही: सिरोही बेल्ट में भी इसके गैंग ने फैक्ट्री का संचालन शुरू किया था।
- मुनाफे का गणित: वह महाराष्ट्र से ड्रग्स बनाने का सस्ता फॉर्मूला सीखकर आया था। मात्र 1 लाख रुपये की लागत से केमिकल प्रक्रिया द्वारा वह 1 किलो MD तैयार करता था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 30 लाख रुपये तक होती है।
बहुरुपिया बनकर कोलकाता में छुपा था शातिर रमेश
गिरफ्तारी से बचने के लिए रमेश ने अपना हुलिया और पहचान पूरी तरह बदल ली थी। कोलकाता में वह खुद को केमिस्ट्री का टीचर बताता था ताकि केमिकल की जानकारी पर कोई शक न करे। साथ ही उसने खुद को एक बड़ा केमिकल व्यापारी भी घोषित कर रखा था। वह मोबाइल का उपयोग बिल्कुल नहीं करता था और हवाई जहाज से सफर कर पुलिस को छकाता था।
पकड़े जाने की फिल्मी पटकथा: ‘विषाणुबाहु’ की जीत
आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में ANTF की टीम ने कोलकाता के हावड़ा में स्थित ‘जगदम्बा स्टील’ दुकान के पास मजदूर बनकर कई दिनों तक रेकी की। पुलिस को पता चला कि रमेश आजकल धर्म के रास्ते पर है और 12 ज्योतिर्लिंगों व चारों धामों की यात्रा कर चुका है। जब वह गंगासागर जाने की तैयारी कर रहा था, तभी टीम ने उसे दबोच लिया।
आईजी विकास कुमार ने इस ऑपरेशन में शामिल सभी पुलिसकर्मियों की पीठ थपथपाई है और उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अपराधी की जानकारी साझा करें, उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
सर्कल न्यूज़ के लिए गुमान सिंह राव की रिपोर्ट। जय हिंद।



