पूर्व सांसद देवजी पटेल ने उठाई सांचौर के किसानों की आवाज़; कहा- कृषि भूमि गई तो किसानों को होगा भारी नुकसान, डीएलसी नहीं बाज़ार मूल्य पर मिले मुआवज़ा
राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में प्रस्तावित 'जैसलमेर-भाभर रेलवे लाइन' परियोजना के एलाइनमेंट को लेकर पूर्व सांसद देवजी पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सांचौर क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा करने की पुरज़ोर मांग की है। दिनांक 28 मई 2026 को भेजे गए पत्र (क्रमांक: पी.एस/पूं.एम.पी/जालोर-सिरोही/2026/154) के माध्यम से पटेल ने रेलवे लाइन के रूट में बदलाव करने और प्रभावित होने वाले किसानों को वास्तविक बाज़ार मूल्य पर मुआवज़ा देने की पैरवी की है.
उपजाऊ ज़मीन की जगह सीमा के पास सरकारी भूमि का उपयोग हो
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में पूर्व सांसद देवजी पटेल ने बताया कि सांचौर क्षेत्र पूर्णतः कृषि एवं पशुपालन पर आधारित है. नर्मदा मुख्य नहर के आने से यहाँ कृषि क्रांति आई है. वर्तमान में यदि रेलवे लाइन का एलाइनमेंट मेघावा, रामपुरा, चितलवाना, हिण्डवाड़ा, आमली, डबाल, अगर, सांचौर, गरडाली एवं गोलासन जैसे घनी आबादी और उपजाऊ कृषि क्षेत्रों से होकर निकाला गया, तो बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि नष्ट हो जाएगी.
पटेल ने सुझाव दिया है कि इस रेलवे लाइन का एलाइनमेंट भारत-पाक सीमा के निकट उपलब्ध अनउपजाऊ एवं सरकारी भूमि से होकर निर्धारित किया जाए, जिससे सांचौर की उपजाऊ भूमि और हजारों किसान सुरक्षित रह सकें.
शहर से दूर बने रेलवे स्टेशन, व्यापार को मिलेगी गति
पत्र में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सुझाव देते हुए कहा गया है कि यदि सांचौर रेलवे स्टेशन को शहर से कुछ दूरी पर स्थापित किया जाता है, तो उसके आसपास नए बाज़ार, व्यापारिक गतिविधियाँ और विकास केंद्र विकसित होंगे. इससे पूरे क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी.
डीएलसी दर बहुत कम, बाज़ार मूल्य पर मिले मुआवज़ा
किसानों के आर्थिक नुकसान का ज़िक्र करते हुए देवजी पटेल ने कहा कि सांचौर में पूर्व में भी नर्मदा नहर परियोजना, वितरिका निर्माण, भारतमाला परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के कारण किसानों की सैकड़ों बीघा उपजाऊ ज़मीन अधिग्रहित की जा चुकी है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है.
वर्तमान में यहाँ की कृषि भूमि का वास्तविक बाज़ार मूल्य लाखों रुपये प्रति बीघा है, जबकि अधिकारियों द्वारा निर्धारित डीएलसी (DLC) दर बेहद कम है. संसद द्वारा पारित कानून के अनुसार मुआवज़ा वास्तविक बाज़ार मूल्य पर मिलना चाहिए, लेकिन हकीकत में किसानों को डीएलसी दर पर ही भुगतान किया जा रहा है. उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि यदि रेलवे लाइन कृषि भूमि से ही गुज़रती है, तो किसानों को उचित और बाज़ार मूल्य के आधार पर मुआवज़ा दिलाया जाए.
मुख्य मांगें:
- रेलवे लाइन का रूट सांचौर के कृषि क्षेत्रों के बजाय भारत-पाक सीमा के पास की सरकारी और बंजर भूमि से तय हो.
- सांचौर रेलवे स्टेशन को शहर से थोड़ी दूरी पर बनाया जाए ताकि नए व्यापारिक केंद्र विकसित हो सकें.
- यदि भूमि अधिग्रहण अनिवार्य हो, तो कम डीएलसी दर के बजाय वास्तविक मार्केट वैल्यू के आधार पर मुआवज़ा मिले.







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां