जटिल केस, सिजेरियन की मजबूरी और अहमदाबाद तक की दौड़; फिर एक फोन कॉल और बदल गई किस्मत। मारवाड़ के रेवदर में डॉ. भाटी ने एक साथ तीन ऐसे मामलों में सामान्य प्रसव करवाकर चिकित्सा जगत को चौंका दिया है, जिन्हें बड़े-बड़े मेडिकल कॉलेजों ने ‘असंभव’ करार दे दिया था।
केस 1: अहमदाबाद से बाड़मेर तक सिजेरियन का डर, रेवदर में मिली राहत
रेडाना (बाड़मेर) निवासी कल्पना कुंवर पत्नी नीम सिंह राजपूत की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। कल्पना की पहली डिलीवरी बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) से हुई थी। दूसरी बार जब वह गर्भवती हुईं, तो बाड़मेर के सरकारी और निजी सिटी हॉस्पिटलों ने हाथ खड़े कर दिए। चिकित्सकों का तर्क था कि ‘पिछला ऑपरेशन’ और ‘बच्चे का अधिक वजन’ नॉर्मल डिलीवरी की राह में बड़ी बाधा है।
कल्पना के पति नीम सिंह, जिनका अहमदाबाद में व्यवसाय है, उन्हें लेकर गुजरात के नामी वात्सल्य हॉस्पिटल पहुंचे। वहां की स्त्री रोग विशेषज्ञ ने भी ऑपरेशन को ही एकमात्र विकल्प बताया। लेकिन मारवाड़ के मजबूत इरादों वाले परिजनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए डॉ. एस.एस. भाटी से संपर्क किया। रिपोर्ट देखने के बाद डॉ. भाटी ने उन्हें भरोसा दिया। परिणाम यह रहा कि कल रात डॉ. भाटी ने अपने दशकों पुराने अनुभव से सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी करवाकर सबको अचंभित कर दिया।

केस 2: प्रसव पीड़ा का इंतजार और टैक्सी चालक की वह एक सलाह
सिरोही जिले के पोसितरा निवासी कोकू देवी पत्नी दिनेश कुमार चौधरी के मामले में चुनौती अलग थी। डिलीवरी की तारीख (Due Date) निकलने के कई दिन बाद भी प्रसव पीड़ा शुरू नहीं हुई थी। सिरोही और आबूरोड के सबसे बड़े अस्पतालों ने खतरे को देखते हुए तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी। हताश परिजन अस्पताल की सीढ़ियों पर खड़े थे, तभी एक टैक्सी चालक ने डॉ. भाटी का नाम सुझाया। आबूरोड से रेवदर पहुंचते ही डॉ. भाटी ने कुछ ही मिनटों में सामान्य प्रसव करवाकर परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
केस 3: गुलाबगंज की जोशना देवी को मिला मातृत्व का सुख
ऐसा ही एक और मामला गुलाबगंज निवासी जोशना देवी पत्नी राजूराम चौधरी का रहा। उन्हें भी आबूरोड के अस्पतालों ने ऑपरेशन का डर दिखाया था। वह भी आखिरी उम्मीद लेकर डॉ. भाटी के पास पहुंचीं। डॉ. भाटी ने न केवल उनकी नॉर्मल डिलीवरी करवाई, बल्कि एक बार फिर यह साबित किया कि अनुभव और सकारात्मक सोच से सर्जरी के बढ़ते चलन को रोका जा सकता है।

क्यों खास है भारती हॉस्पिटल? (रिसर्च और इतिहास)
चिकित्सा क्षेत्र में आज जहां ‘सिजेरियन’ एक बिज़नेस मॉडल बनता जा रहा है, वहीं रेवदर का भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर एक अपवाद की तरह उभरा है।
- VBAC (Vaginal Birth After Cesarean): चिकित्सा विज्ञान में एक बार सिजेरियन होने के बाद दूसरी बार नॉर्मल डिलीवरी (VBAC) को बेहद जोखिम भरा माना जाता है, लेकिन डॉ. भाटी ने इसमें महारत हासिल कर ली है।
- वैश्विक पहचान: केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और यहां तक कि विदेशों में बसे प्रवासी भारतीय भी जटिल मामलों में डॉ. भाटी के कौशल पर भरोसा जताते हैं।
- मानवीय दृष्टिकोण: डॉ. भाटी का मानना है कि हर सिजेरियन ऑपरेशन को टाला जा सकता है यदि चिकित्सक धैर्य और सही तकनीक का उपयोग करे।
डॉ. भाटी का संदेश
“मरीज का भरोसा और चिकित्सक का धैर्य ही नॉर्मल डिलीवरी की चाबी है। हमारा लक्ष्य केवल प्रसव करवाना नहीं, बल्कि मां और बच्चे को बिना किसी अनावश्यक सर्जरी के स्वस्थ जीवन देना है।”
निर्णय आपका: यदि आप भी सिजेरियन के डर से गुजर रहे हैं, तो एक बार विशेषज्ञ की राय जरूर लें। मारवाड़ में नॉर्मल डिलीवरी के पर्याय बन चुके डॉ. भाटी आज उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण हैं जो ऑपरेशन के आर्थिक और शारीरिक बोझ से बचना चाहते हैं।



