जालेरा कल्ला के गोविंद ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम, विधि क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाओं पर डाला प्रकाश
रानीवाड़ा। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है जालेरा कल्ला (रानीवाड़ा) निवासी युवा अधिवक्ता गोविंद देवासी ने। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) को अपने प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह सफलता न केवल उनके कड़े परिश्रम को दर्शाती है, बल्कि उनके गहरे विधि ज्ञान और कानूनी कौशल का जीवंत प्रमाण भी है।
देशभर के 2.51 लाख अभ्यर्थियों में बनाई जगह
बीते वर्ष 30 नवंबर को आयोजित हुई इस परीक्षा में देशभर से कुल 2,51,000 से अधिक अधिवक्ताओं ने भाग्य आजमाया था। कड़े कड़े मुकाबले और उच्च स्तरीय मानकों वाली इस परीक्षा में लगभग 1,74,000 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए। गोविंद देवासी ने इस चुनौतीपूर्ण परीक्षा को पहले ही झटके में पास कर अपनी मेधा शक्ति का लोहा मनवाया है।

शिक्षा और शैक्षणिक सफर
गोविंद की प्रारंभिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा रानीवाड़ा के राजकीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने विधि की पढ़ाई के लिए जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU), जोधपुर का रुख किया, जहां से सत्र 2023-24 में उन्होंने LLB (विधि स्नातक) की उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में वे राजकीय बांगड़ विधि महाविद्यालय से LLM (विधि स्नातकोत्तर – संविधान) की पढ़ाई कर रहे हैं और राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में निरंतर वकालत का अभ्यास कर रहे हैं।
विधि क्षेत्र में क्या है LLB और LLM का महत्व?
गोविंद की सफलता के बीच यह समझना आवश्यक है कि कानून की डिग्रियां करियर के कौन से द्वार खोलती हैं:
- LLB (Bachelor of Laws): यह वकालत की बुनियादी सीढ़ी है। इसे करने के बाद व्यक्ति बार काउंसिल में पंजीकरण करा सकता है। यह न्यायिक सेवाओं (RJS), कानूनी सलाहकार और कॉर्पोरेट वकील बनने का आधार है।
- LLM (Master of Laws): जैसा कि गोविंद संविधान में विशेषज्ञता हासिल कर रहे हैं, LLM करने के बाद छात्र कानून के विशेष क्षेत्रों (जैसे संविधान, क्रिमिनल लॉ, या कॉर्पोरेट लॉ) के विशेषज्ञ बनते हैं। यह उच्च शिक्षा, प्रोफेसर बनने (NET/PhD के माध्यम से) और रिसर्च के क्षेत्र में जाने के लिए अनिवार्य है।
- AIBE और COP: बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, प्रैक्टिस करने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) अनिवार्य है, जो ऑल इंडिया बार परीक्षा पास करने के बाद ही मिलता है। इसके बिना कोई भी अधिवक्ता स्वतंत्र रूप से न्यायालय में पैरवी नहीं कर सकता।
सफलता का मंत्र: अपडेट रहें और गुरुओं से सीखें
अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए गोविंद देवासी ने कहा कि विधि का क्षेत्र जितना सम्मानजनक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। उन्होंने उभरते अधिवक्ताओं के लिए कुछ प्रमुख सूत्र साझा किए:
- निरंतर अध्ययन: कानून हर दिन बदलता है, इसलिए स्वयं को अपडेट रखना ही एकमात्र विकल्प है।
- वरिष्ठों का मार्गदर्शन: बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं। सीनियर्स के साथ रहकर बारीकियां सीखना ही वकालत की असली पाठशाला है।
- धैर्य और निरंतरता: कानून के कार्यों से निरंतर जुड़ाव ही सफलता का असली मंत्र है।
गोविंद की इस उपलब्धि पर रानीवाड़ा क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों, अधिवक्ता संघ और परिजनों ने हर्ष व्यक्त किया है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।



