गुजरात के पूर्व नेता प्रतिपक्ष धनानी ने जिलाध्यक्ष चुनाव को लेकर संभावित प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से किए सवाल-जवाब; कहा- ‘अब संगठन-केंद्रित नेतृत्व का जन्म हुआ है।’
जालोर (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क)।
कांग्रेस के संगठन को ज़मीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘संगठन सर्जन अभियान’ के तहत ज़िलाध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया जालोर में शुरू हो गई है। इसी क्रम में गुजरात कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ नेता परेश धनानी जालोर में पर्यवेक्षक के रूप में पहुंचे। धनानी ने यहाँ कांग्रेस के संभावित ज़िलाध्यक्ष प्रत्याशियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं से विस्तृत चर्चा कर उनकी राय जानी। बाद में प्रेस वार्ता में उन्होंने पत्रकारों के तीखे सवालों का भी जवाब दिया और संगठन की मजबूती पर ज़ोर दिया।

संगठन को मजबूत बनाने पर ज़ोर: “प्रशासन ही पार्टी की रीढ़ है”
पर्यवेक्षक परेश धनानी ने अपने संवाद में स्पष्ट किया कि कांग्रेस संगठन की कमियों को दूर करने के लिए नेतृत्व ने यह ‘संगठन सर्जन अभियान’ शुरू किया है।
धनानी ने कहा, “पहले पदों का वितरण नेताओं की सिफ़ारिशों पर होता था, यह एक नेता-केंद्रित संगठन था। अब एक संगठन-केंद्रित नेतृत्व का जन्म हुआ है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “प्रशासन पार्टी की रीढ़ है। प्रशासन के बिना कोई भी संगठन कभी नहीं टिक सकता।”
उन्होंने विश्वास जताया कि अगर ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नेतृत्व दिया जाता है, तो पार्टी की कई समस्याओं का समाधान होगा और संगठन मजबूत बनेगा, जिसका लाभ राजस्थान, जालोर और देश की जनता को मिलेगा।
कार्यकर्ताओं की आवाज़ को महत्व: ‘सामान्य राय से होगा नए अध्यक्ष का चयन’
ज़िलाध्यक्ष के चयन को लेकर धनानी ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उनकी आवाज़ को सुना जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य संगठनों, पदाधिकारियों और नेताओं, सबकी बात सुन रहे हैं। सुधार के बाद जहाँ एक ‘सामान्य राय’ बनेगी, वही हमारा संगठन होगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि वे जालोर, सिरोही और पूरे राजस्थान में कार्यकर्ताओं की बात सुनने आए हैं और सभी की राय नए ज़िलाध्यक्ष में परिलक्षित होगी।
सुरक्षा और विद्रोह पर तीखे सवाल
प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने पार्टी में व्याप्त असुरक्षा और कुछ नेताओं के विद्रोह संबंधी घटनाओं पर तीखे सवाल किए।
एक सवाल के जवाब में, जिसमें कांग्रेस के निर्वाचित प्रतिनिधि की असुरक्षा का मुद्दा उठाया गया, धनानी ने कहा कि यह सवाल भाजपा के मुख्यमंत्री से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “पूरा देश असुरक्षित है। आवाज़ उठाने वालों के घरों तक सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके पहुँचा जा रहा है, उन्हें सलाखों के पीछे धकेला जा रहा है।”
पार्टी के भीतर विद्रोह और असंतोष पर उन्होंने कहा, “हम अपनी पार्टी में किसी की आवाज़ को नहीं रोकते। यह वही कांग्रेस है जिसने अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन किया है।” उन्होंने पत्रकारों को याद दिलाया कि पार्टी एकजुट है और सब एक मंच पर बैठकर लोगों की समस्याओं के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसे माहौल में ‘आज़ादी वापस लाने’ के लिए कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है।
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