बिल वसूली में बाहुबली, बहाली में मूकदर्शक; भीषण गर्मी में तड़प रहे ग्रामीण, दी जनआंदोलन की चेतावनी
रानीवाड़ा। जब जेब से पैसे ऐंठने हों, तो बिजली विभाग के कारिंदे चीते की रफ्तार से दौड़ते हैं। जरा सा बिल बकाया क्या हुआ, मानो कोई संगीन जुर्म हो गया—फौरन कटर लेकर कनेक्शन काटने पहुंच जाते हैं। लेकिन जब कुदरत के कहर से पूरा गांव अंधेरे में डूब जाए, तो यही महकमा कुंभकर्णी नींद सो जाता है। रानीवाड़ा क्षेत्र के डीगांव में बिजली विभाग की इसी दोहरी और संवेदनहीन कार्यप्रणाली के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। भाजपा नेताओं की आवाज़ भी स्थानीय प्रशासन नहीं सुन रहा, लिहाज़ा उनमे गुस्सा है|

आंधी ले गई बिजली, विभाग ले गया सुध
दरअसल, पिछले सप्ताह इलाके में आई तेज आंधी और तूफान ने डीगांव में भारी तबाही मचाई थी। चक्रवात के थपेड़ों से गांव में जगह-जगह विद्युत पोल जमींदोज हो गए और हाईवोल्टेज तार टूटकर जमीन पर आ गिरे। इस हादसे के बाद से गांव की करीब एक दर्जन ढाणियों की बत्ती पूरी तरह गुल है। एक पूरा हफ्ता बीत चुका है, लेकिन विभाग का कोई नुमाइंदा टूटे तारों को समेटने तक नहीं पहुंचा। पूरा गांव इस वक्त ‘ब्लैकआउट’ के दौर से गुजर रहा है।
भीषण गर्मी में बेहाल बचपन और बुढ़ापा
पारे के 45 डिग्री के पार पहुंचने और उमस के इस खौफनाक दौर में बिना बिजली के जिंदगी नरक बन चुकी है। घरों में न पंखे चल रहे हैं और न ही पीने के पानी का कोई ठिकाना है। सबसे बदतर हालात मासूम बच्चों, लाचार बुजुर्गों और महिलाओं के हैं, जो दिन-रात गर्मी में तपने को मजबूर हैं। पानी के संकट ने ग्रामीणों की कमर और तोड़ दी है।

“बिल नहीं भरो तो ये लोग डंडा लेकर आ जाते हैं, लेकिन जब पूरा गांव अंधेरे में तड़प रहा है, तो अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। बार-बार शिकायतें करने के बाद भी विभाग तमाशबीन बना हुआ है।”
— पूर्व मंडल भाजपा अध्यक्ष तुलसाराम मांजू
नेताओं ने घेरा, ‘ऊपर’ तक पहुंची गूंज
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष तुलसाराम मांजू ने बिजली विभाग की इस सुस्ती पर तीखा प्रहार किया है। मांजू ने कहा कि ग्रामीणों ने लिखित और मौखिक, हर स्तर पर विभागीय अधिकारियों को इस संकट से अवगत कराया, लेकिन अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। विभाग की यह घोर उदासीनता बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है।
चेतावनी: …तो ठप करेंगे पूरा सिस्टम!
ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। गांव के मौजिज लोगों और युवाओं ने दोटूक शब्दों में प्रशासन और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को चेतावनी दी है:
- तत्काल बहाली: अगर 24 घंटे के भीतर टूटे पोल खड़े कर तार नहीं जोड़े गए, तो ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे।
- आर-पार की लड़ाई: उग्र जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसके बाद होने वाले किसी भी चक्काजाम या उग्र प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।
अब देखना यह है कि इस कड़क चेतावनी के बाद साहबों की नींद टूटती है या डीगांव के हिस्से में अभी और अंधेरी रातें लिखी हैं।



