* 63 सूरमाओं की लिस्ट में शेखावाटी और जयपुर की चांदी, जालोर-बाड़मेर-दौसा-झालावाड़ जैसे दिग्गजों के जिले 'वंचित'।
* मदन राठौड़ की हरी झंडी के बाद संगठन को धार देने की कोशिश, क्षेत्रीय संतुलन पर उठे सवाल।
सर्किल न्यूज नेटवर्क
जयपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) राजस्थान में संगठन को धरातल पर अभेद्य और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह मजबूत करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देशानुसार भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की बहुप्रतीक्षित घोषणा कर दी है। कुल 63 पदाधिकारियों की इस जंबो लिस्ट में जहां चुनावी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों को भारी तरजीह मिली है, वहीं कुछ जिलों का पत्ता पूरी तरह साफ रहने से सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

संगठन को नए खून और ऊर्जा से सींचने के दावे के साथ घोषित की गई इस टीम में क्षेत्रीय संतुलन साधने की पुरजोर कोशिश की गई है, लेकिन 'वंचित' रह गए जिलों की कसक भी साफ दिखाई दे रही है।

जिलावार विश्लेषण: किसे मिली कितनी जगह?
पूरी सूची का गहराई से विश्लेषण करने पर सामने आता है कि राजधानी जयपुर और शेखावाटी क्षेत्र का इस कार्यकारिणी में जबरदस्त दबदबा रहा है। नीचे सभी 63 पदाधिकारियों का जिलावार विवरण दिया गया है:
| क्र. सं. | जिला | पदाधिकारियों की संख्या |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर (जयपुर, जयपुर दक्षिण, जयपुर देहात उत्तर) | 12 |
| 2 | सीकर | 5 |
| 3 | उदयपुर (उदयपुर, उदयपुर देहात) | 4 |
| 4 | करौली | 3 |
| 5 | कोटा | 3 |
| 6 | टोंक | 3 |
| 7 | बीकानेर (बीकानेर शहर, बीकानेर देहात) | 3 |
| 8 | पाली | 2 |
| 9 | श्रीगंगानगर | 2 |
| 10 | नागौर (नागौर शहर, नागौर देहात) | 2 |
| 11 | अलवर (अलवर उत्तर, अलवर दक्षिण) | 2 |
| 12 | बालोतरा | 2 |
| 13 | भरतपुर | 2 |
| 14 | जोधपुर (जोधपुर देहात उत्तर, जोधपुर उत्तर) | 2 |
| 15 | अजमेर (अजमेर देहात, अजमेर शहर) | 2 |
| 16 | चित्तौड़गढ़ | 1 |
| 17 | बांसवाड़ा | 1 |
| 18 | धौलपुर | 1 |
| 19 | भीलवाड़ा | 1 |
| 20 | सिरोही | 1 |
| 21 | हनुमानगढ़ | 1 |
| 22 | सवाईमाधोपुर | 1 |
| 23 | झुंझुनू | 1 |
| कुल | राजस्थान के विभिन्न संगठनात्मक जिले | 63 |

मुख्य निष्कर्ष और सियासी मायने
1. जयपुर और सीकर का दबदबा
राजनीति का केंद्र माने जाने वाले जयपुर (सहित दक्षिण व देहात) को सबसे ज्यादा 12 पद सौंपे गए हैं। वहीं शेखावाटी के सीकर जिले को 5 पद देकर युवा मोर्चा ने इस बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने का साफ संदेश दिया है। उदयपुर और बीकानेर संभागों को भी संगठन में ठीक-ठाक प्रतिनिधित्व मिला है।

2. ये जिले रह गए पूरी तरह 'वंचित'
संगठन को मजबूत करने के इस बड़े अभियान में राजस्थान के कई अहम जिलों को इस सूची में एक भी जगह नहीं मिली है। इन जिलों के युवाओं को कार्यकारिणी में प्रतिनिधित्व का इंतजार ही रह गया:
- बाड़मेर (हालांकि नए बने बालोतरा को 2 पद मिले हैं, लेकिन मुख्य बाड़मेर जिला वंचित है)
- जैसलमेर
- जालौर शून्य
- * सिरोही (केवल 1 सह-संयोजक पद मिला, बड़ा ओहदा नहीं)
- चूरू (केवल 1 प्रदेश महामंत्री पद मिला, लेकिन बाकी बड़ी सूची से दूर रहा)
- झालावाड़ और बारां (हाड़ौती के इन दो प्रमुख जिलों से शून्य प्रतिनिधित्व)
- बूंदी
- प्रतापगढ़, डूंगरपुर और राजसमंद (वागड़ और मेवाड़ के इन आदिवासी व महत्वपूर्ण क्षेत्रों की उपेक्षा चर्चा का विषय है)
- दौसा
रणनीतिक संदेश: युवा मोर्चा की इस नई टीम के जरिए भाजपा ने उन क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की है जहां पिछले चुनावों में समीकरण बदले थे। हालांकि, पूरी तरह अछूते रह गए जिलों में कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभालना और वहां संगठन को सक्रिय रखना आगामी दिनों में प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।







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