सर्किल न्यूज
पालनपुर। अंबाजी पदयात्रा के पावन मार्ग पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब कमालपुरा में मजदूरी करने वाले 22 वर्षीय आकाश जशवंतजी ठाकोर अचानक चक्कर खाकर अचेत होकर गिर पड़े। शरीर पसीने से तर-बतर था और देखते ही देखते युवक की नब्ज व दिल की धड़कनें पूरी तरह थम गईं। स्थिति अत्यंत नाजुक थी, लेकिन पास ही स्थित लायंस क्लब के मेडिकल कैंप में मौजूद पालनपुर के नंबर वन फिजिशियन डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता की त्वरित सक्रियता और विशेषज्ञता ने मौत के मुंह में समा रहे युवक को नया जीवन दे दिया।

90 से 120 सेकंड में लौटीं सांसें जैसे ही साथी मजदूर आकाश को अचेत अवस्था में उठाकर कैंप में लाए, डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांप लिया। जांच में पल्स न मिलने पर डॉ. गुप्ता ने बिना एक पल गंवाए पैर ऊंचे कर मॉडिफाइड सीपीआर (CPR) सहित आपातकालीन उपचार शुरू किया। डॉ. गुप्ता के कुशल प्रयासों का ही परिणाम था कि लगभग 90 से 120 सेकंड के भीतर युवक की नब्ज वापस लौट आई और वह धीरे-धीरे होश में आ गया।
3-4 मिनट की देरी भी पड़ सकती थी भारी डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि यदि उपचार में 3 से 4 मिनट का भी विलंब हो जाता तो युवक की स्थिति अत्यंत गंभीर व जानलेवा हो सकती थी। युवक को तुरंत ठंडा पेय देकर ढांढस बंधाया गया। स्वस्थ होने के बाद युवक ने पुनः अपनी यात्रा शुरू की।
क्या है 'वासोवेगल सिंकोप' (Vasovagal Syncope)?
डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता ने दी बीमारी की पूरी जानकारी: डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता ने इस चिकित्सकीय स्थिति को गंभीर 'वासोवेगल एपिसोड' बताया। उनके अनुसार:
- शरीर की अति-प्रतिक्रिया: वासोवेगल सिंकोप में किसी कारण (जैसे अत्यधिक थकान, डिहाइड्रेशन, भय या तनाव) से शरीर अचानक अति-प्रतिक्रिया (ओवररिएक्शन) देता है।
- ब्लड प्रेशर व धड़कन का गिरना: इस स्थिति में अचानक रक्तचाप (बीपी) और हृदय की धड़कनों की गति बेहद धीमी हो जाती है।
- मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की कमी: धड़कन और बीपी गिरने से दिमाग में थोड़े समय के लिए रक्त का संचार कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को चक्कर आते हैं और वह बेहोश हो जाता है।
- सावधानी: सामान्यतः व्यक्ति थोड़े समय में होश में आ जाता है, परंतु यदि नब्ज रुक जाए या पहली बार गंभीर लक्षण दिखें, तो तत्काल सीपीआर और चिकित्सकीय जांच जीवन रक्षक सिद्ध होती है।
सेवा और समर्पण की मिसाल हैं डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता उल्लेखनीय है कि डॉ. सुरेन्द्र गुप्ता केवल पालनपुर के शीर्ष फिजिशियन ही नहीं, बल्कि एक प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। देश-विदेश में अनेक स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर वे अब तक हजारों लोगों को सेवा दे चुके हैं। अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता के लिए वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्याख्यान देने जाते रहे हैं। उनके इसी निस्वार्थ सेवा भाव और चिकित्सा जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। पदयात्रा मार्ग पर समय रहते दिखाई गई उनकी यह सूझबूझ आज हर तरफ चर्चा और प्रशंसा का विषय बनी हुई है।







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