श्री क्षत्रिय युवक संघ के शिविर में बही संस्कार-सरिता, रश्मि कंवर बोलीं—’चारित्रिक श्रेष्ठता ही सच्ची शक्ति’, मातृशक्ति प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन गूंजे प्रेरक विचार; स्नेह मिलन में उमड़ी महिलाओं की भागीदारी
Circle News Network रानीवाड़ा। जब अनुशासन दिनचर्या बन जाए और खेल-कूद चरित्र निर्माण का माध्यम, तब व्यक्तित्व में नई चमक उभरती है। कस्बे के यू.आर. कॉलेज, आजोदर में श्री क्षत्रिय युवक संघ के तत्वावधान में आयोजित मातृशक्ति प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। अलसुबह जागरण और ईश प्रार्थना के साथ गूंजे मंत्रोच्चार के बाद मैदान पर स्वयंसेविकाओं ने योग मुद्राओं के जरिए आत्मसंयम का पाठ पढ़ा।
क्रीड़ा सत्र के दौरान पारंपरिक खेलों के जरिए मनोवैज्ञानिक तरीके से सहयोग, त्वरित निर्णय क्षमता और शारीरिक-मानसिक सुदृढ़ता का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। दोपहर में आयोजित सामास्या सत्र को संबोधित करते हुए शिविर प्रमुख रश्मि कंवर देलदरी ने कहा कि भौतिक चकाचौंध के इस दौर में बुराइयों से दूर रहकर ही चारित्रिक श्रेष्ठता हासिल की जा सकती है। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसे शिविर दरअसल संस्कारों के सींचन का वह माध्यम हैं, जहां से जीवन की दिशा तय होती है। बौद्धिक सत्र में वक्ताओं ने गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराते हुए ऐतिहासिक वीर-वीरांगनाओं के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में जुटने का आह्वान किया।
शिविर के अंतर्गत सोमवार को ‘मातृशक्ति स्नेह मिलन’ का भी आयोजन हुआ। इसमें रानीवाड़ा क्षेत्र की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उपस्थित महिलाओं को शिविर की दैनंदिनी, सामूहिक अनुशासन और संघ की कार्यप्रणाली से रूबरू कराया गया।
एक नजर : श्री क्षत्रिय युवक संघ वर्ष 1946 में पूज्य तनसिंह जी द्वारा स्थापित ‘श्री क्षत्रिय युवक संघ’ एक गैर-राजनीतिक एवं विशुद्ध संस्कार निर्माणकारी संगठन है। यह संगठन किसी बाह्य प्रदर्शन के बजाय प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च प्रशिक्षण शिविरों के जरिए व्यक्ति के अंतःकरण को परिष्कृत करने का कार्य करता है। खेल, सहभोज, सामास्या (आत्मचिंतन सत्र) और मौन जैसी अनूठी कार्यप्रणाली के माध्यम से यह संगठन बालकों, युवकों और मातृशक्ति में त्याग, कर्तव्यनिष्ठा तथा चारित्रिक शुचिता का निर्माण कर उन्हें राष्ट्र व समाज सेवा के योग्य बनाता है।



