सर्कल न्यूज़ की खबर का बड़ा असर; भीनमाल, डेडवा और जोधपुर से बढ़े मदद के हाथ, नवयुवकों , श्री राम सेवा संगठन और बजरंग टीम के सहयोग से मिला गौमाता को जीवनदान।
भीनमाल/कोड़िटा। कहते हैं कि जहां जन-आवाज बुलंद होती है, वहां सोई हुई संवेदनाएं भी जाग उठती हैं। भीनमाल के पास कोड़िटा गांव से आई एक मर्मांतक खबर ने कल जब ‘सर्कल न्यूज़ नेटवर्क’ के माध्यम से एडिटर गुमान सिंह ने समाज के सामने कदम रखा, तो मानो हर सनातनी का दिल पसीज गया। कोड़िटा गांव में पिछले दो महीनों से एक बेजुबान गौमाता असहनीय दर्द से तड़प रही थी। किसी अज्ञात क्रूरता या लापरवाही के कारण उसके सिर पर सींग के ठीक नीचे एक रस्सी बांधी गई थी। वक्त बीतने के साथ वह रस्सी खोली नहीं जा सकी और धीरे-धीरे वह चमड़ी को चीरती हुई मांस के अंदर धंस गई।
अंदर ही अंदर गहरा घाव हो चुका था, जिसने सड़न और भयानक दर्द का रूप ले लिया था। गौमाता तड़प रही थी, लेकिन उसकी मूक चीख सुनने वाला कोई नहीं था। इस बीच गांव के सजग नागरिक शंभू सिंह राव की नजर इस पीड़ा पर पड़ी। उन्होंने तुरंत ‘सर्कल न्यूज़ नेटवर्क’ को इस संकट से अवगत कराया।

खबर का धुआंधार इम्पैक्ट: फोन की बजी घंटियां, उमड़ा जनसैलाब
जैसे ही कल इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, पूरे क्षेत्र में खलबली मच गई। खबर का असर (इम्पैक्ट) इस कदर हुआ कि भीनमाल सहित डेडवा, सांचोर और यहां तक कि जोधपुर से भी अनगिनत फोन शंभू सिंह राव के पास आने शुरू हो गए। हर कोई इस रेस्क्यू में अपना योगदान देने को आतुर था।

चलाया गया ‘महा-ऑपरेशन’, सूझबूझ से बची जान
मदद की इसी कड़ी में आज सुबह कोड़िटा गौ सेवा समिति के नवयुवक मंडल, कोड़िटा मंडल के जांबाज सदस्यों और श्री राम सेवा संगठन भीनमाल के कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

- रणनीति: गौमाता को शांत करने के लिए पहले हरा चारा डाला गया।
- सुरक्षा: स्कूल की चारदीवारी के पास ले जाकर अत्यंत सूझबूझ के साथ गाय को रस्सियों से सुरक्षित रूप से बांधा गया ताकि उसे चोट न आए।
- ऑपरेशन: जब युवाओं ने हिम्मत जुटाकर सिर के अंदर धंसी हुई उस रस्सी को काटा और निकाला, तो अंदर से खून का फव्वारा फूट पड़ा। दृश्य भावुक कर देने वाला था, लेकिन युवाओं के हौसले डगमगाए नहीं।

- प्राथमिक उपचार व शिफ्टिंग: घाव को साफ कर तुरंत भीनमाल गौशाला की एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया और गौमाता को आगे के इलाज के लिए भीनमाल भेजा गया।
विशेष सहयोग: इस पूरे रेस्क्यू मिशन को अंजाम देने और गौमाता के प्राण बचाने में शंभू सिंह, हमीरसिंह, नारायण सिंह, हरि सिंह, युवा टीम कोड़िटा, राजू भाई (श्री राम सेवा संगठन) और हड़मत सिंह ने देवदूत बनकर अपनी महती भूमिका निभाई।
अब ‘श्री राम गो सेवा संगठन भीनमाल’ संभालेगा कमान
अस्पताल पहुंचने के बाद अब इस घायल और पीड़ित गौमाता की पूरी देखरेख और उपचार की जिम्मेदारी ‘श्री राम गो सेवा संगठन भीनमाल’ ने अपने कंधों पर ले ली है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक गौमाता पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो जाती, उनकी टीम दिन-रात सेवा में मुस्तैद रहेगी।
गौ-महिमा: सनातन का आधार है गौमाता
“गावो विश्वस्य मातरः” अर्थात गाय पूरे विश्व की माता है। केंद्र सरकार इसे राष्ट्रमाता का दर्जा कागजों में दे या न दे, लेकिन सनातन धर्म की परंपरा और हर हिंदू के दिल में गौमाता का स्थान सर्वोच्च है। गाय मात्र एक पशु नहीं, बल्कि हमारे सनातन धर्म के 33 करोड़ देवी-देवताओं की साक्षात संवाहक और वास-स्थल है।
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जो मनुष्य इस बेजुबान और पवित्र जीव को कष्ट देता है, वह जीते जी और मृत्यु के बाद भी घोर नरक का भागी बनता है, उसका जीवन दुखों से घिर जाता है। इसके विपरीत, तड़पते हुए गोवंश को जीवनदान देना साक्षात ईश्वर की आराधना करने के समान है।
कोड़िटा के नवयुवक मंडल और श्री राम सेवा संगठन के इन जांबाज युवाओं ने आज जो सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी और तारीफ के काबिल है। ‘सर्कल न्यूज़ नेटवर्क’ इन सभी राष्ट्रभक्त और गौभक्त युवाओं को कोटि-कोटि धन्यवाद देता है।



