उपखंड मुख्यालय पर सौंपा ज्ञापन आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए प्रताप फाउण्डेशन ने उठाई आवाज
रानीवाड़ा | आगामी 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों में आर्थिक पिछड़ा वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण देने की मांग को लेकर प्रताप फाउण्डेशन के सदस्यों ने बुधवार को रानीवाडा उपखंड मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपा। दोपहर को लक्ष्मण सिंह देवड़ा, रतनपुर तनुसिंह देवड़ा, घेवाराम पुरोहित, अमरसिंह सोलंकी, महेन्द्र पुरोहित, शेरसिंह सोलंकी और बलवंत पुरोहित के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी (SDM) सुनील कुमार को मुख्यमंत्री के नाम यह ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन में EWS आरक्षण की मांग के प्रमुख कारण निम्नलिखित बताए गए हैं:
- संवैधानिक समानता: केंद्र सरकार ने संविधान के 103वें संशोधन के तहत EWS को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण दिया है, जो राजस्थान में भी लागू है। इसी तर्ज पर पंचायती राज में भी आरक्षण की आवश्यकता है।
- प्रतिनिधित्व का अभाव: राजस्थान की 352 पंचायत समितियों में से 105 समितियों में अनारक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व 10% से भी कम है। 32 समितियां ऐसी हैं जहाँ एक भी सदस्य नहीं है, जबकि 50 समितियों में केवल एक सदस्य है।
- जिला परिषदों की स्थिति: राज्य की 33 जिला परिषदों में से 8 ऐसी हैं, जहाँ अनारक्षित वर्ग के सदस्यों की संख्या 10% से कम है। डूंगरपुर में यह संख्या शून्य है, जबकि दौसा और करौली में केवल एक-एक सदस्य है।
- महंगे चुनाव: चुनाव के बढ़ते खर्चों के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से बाहर होता जा रहा है, जिससे उनका प्रतिनिधित्व निरंतर घट रहा है।
- राज्य सरकार का अधिकार: पंचायती राज राज्य सूची का विषय है, इसलिए राज्य सरकार के पास 1994 के अधिनियम में संशोधन करने और EWS को समान अवसर प्रदान करने का पूर्ण अधिकार है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि सामाजिक न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत के तहत राज्य सरकार जल्द ही अधिनियम में संशोधन करे ताकि EWS वर्ग को भी चुनाव लड़ने के समान अवसर मिल सकें।







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