भीनमाल। सरकारी राशन दुकानों पर गेहूं वितरण में होने वाली घटतौली और धांधली पर लगाम कसने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्रदेश स्तर पर बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। अब जिले की सभी राशन दुकानों पर ई-पोस मशीनों को आधुनिक ब्लूटूथ इलेक्ट्रॉनिक कांटों (तराजू) से जोड़ दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत जब तक तराजू पर लाभार्थी के हिस्से का पूरा वजन नहीं चढ़ेगा, तब तक ई-पोस मशीन से रसीद जनरेट नहीं होगी।
तकनीक का पहरा: ‘ओके’ बोलने पर ही मिलेगी पर्ची
नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता पारदर्शिता है। विभाग ने ई-पोस मशीनों को अपडेट कर उन्हें सीधे कांटों से सिंक कर दिया है। 10 से 20 ग्राम की कमी होने पर भी मशीन लाभार्थी का डेटा स्वीकार नहीं करेगी। जैसे ही निर्धारित मात्रा पूरी होगी, मशीन से ‘ओके’ की आवाज आएगी और उसके बाद ही प्रिंटेड रसीद बाहर निकलेगी। इससे उपभोक्ताओं को यह भरोसा रहेगा कि रसीद में अंकित मात्रा और उन्हें मिला राशन एक समान है। इसके साथ ही विभाग ने पारदर्शिता के लिए सभी राशन दुकानों की जियो टैगिंग भी अनिवार्य कर दी है।
आंकड़ों की नजर में जालोर और भीनमाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जालोर जिले में खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) का लाभ लेने वाले कुल 2,62,715 परिवार पंजीकृत हैं। अकेले भीनमाल उपखंड में 21,048 परिवार इस योजना से जुड़े हैं। जिले भर में हर महीने लगभग 5,999 मीट्रिक टन गेहूं का वितरण इन परिवारों के बीच किया जाता है, जिसे अब इस नई तकनीक के माध्यम से बांटा जाएगा।
डीलरों ने जताई आपत्ति: “बढ़ेगा समय, होगी परेशानी” प्रदेश प्रवक्ता वरदाराम देवासी ने विभाग के इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रणाली बिना पूर्व सूचना और तैयारी के लागू की गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से एक राशन कार्ड पर वितरण करने में करीब 25 से 30 मिनट का समय लग सकता है, जिससे दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ेगी। साथ ही, जिले में कई डीलरों के पास दो-दो दुकानों का कार्यभार (अस्थाई चार्ज) है, जिससे तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर वितरण कार्य और भी जटिल हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- ब्लूटूथ तकनीक: ई-पोस मशीन और तराजू का सीधा संपर्क।
- जीरो टॉलरेंस: वजन कम होने पर रसीद निकलना असंभव।
- जियो टैगिंग: दुकान की लोकेशन पर विभाग की सीधी निगरानी।
- फरवरी से प्रभावी: इसी माह से लागू हुई नई वितरण प्रक्रिया।



