सिरोही। चिकित्सा क्षेत्र में जहां आज के दौर में सिजेरियन ऑपरेशन (सिजेरियन सेक्शन) की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं उत्तर भारत के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. भाटी ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और सेवा भावना का परिचय दिया है। डॉ. भाटी ने अलग-अलग राज्यों और जिलों से आई 9 गर्भवती महिलाओं की एक ही दिन में सफल नॉर्मल डिलीवरी करवाकर न केवल उन्हें ऑपरेशन के दर्द और खर्च से बचाया, बल्कि मानवता की एक अनूठी मिसाल भी पेश की है।
डॉ. भाटी की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि यदि सही अनुभव और अटूट विश्वास हो, तो जटिल से जटिल मामलों में भी सामान्य प्रसव संभव है। उनके इस प्रयास की क्षेत्र भर में सराहना हो रही है।

प्रमुख मामले: जहां जवाब दे चुके थे अस्पताल
डॉ. भाटी के पास आए अधिकांश मामले ऐसे थे, जिन्हें अन्य अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी जा चुकी थी। आइए नजर डालते हैं उन भाग्यशाली महिलाओं पर:
- नयना बेन पत्नी हितेश भाई ओड निवासी वाव (गुजरात): इन्हें थराद में डॉक्टरों ने सिजेरियन का बोल दिया था।
- मान्यता कुंवर पत्नी जितेंद्र सिंह राठौड़ निवासी नारणावास (हाल गोवा): गोवा के डॉक्टरों ने इन्हें ऑपरेशन अनिवार्य बताया था।
- अंजलि कुमारी पत्नी लाल सिंह राजपूत (बिहार) हाल सनवाडा सिरोही: बाहरी राज्य से होने के बावजूद इन्होंने डॉ. भाटी पर भरोसा जताया।
- ममता देवी पत्नी लक्ष्मीनारायण व्यास, भीलवाड़ा: इनका पहला प्रसव सिजेरियन से हुआ था, जिसके बाद अक्सर सामान्य प्रसव मुश्किल माना जाता है, लेकिन डॉ. भाटी ने इसे संभव कर दिखाया।
- सीता देवी पत्नी नाथा राम देवासी निवासी डोडुआ, सिरोही: गर्भ में बच्चा उल्टा होने के कारण सिरोही के एक निजी अस्पताल ने सिजेरियन की सलाह दी थी।
- पेपी देवी पत्नी वचनाराम कलबी (रोड़ा खेड़ा) और विमला देवी पत्नी रामाराम देवासी (मण्डवाड़िया): दोनों को सिरोही अस्पताल में ऑपरेशन के लिए कहा गया था।
- फ़ाऊ कुमारी पत्नी विष्णु जी चौधरी (गुलाबगंज) और सकू कुमारी पत्नी कलाराम चौधरी (विकणवास): इन दोनों को आबुरोड में सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई थी।

डॉ. भाटी: उत्तर भारत में नॉर्मल डिलीवरी के पर्याय
डॉ. भाटी अपनी पुरानी रिसर्च और वर्षों के अनुभव के आधार पर जटिल स्थितियों में भी सामान्य प्रसव करवाने के लिए पूरे उत्तर भारत में विख्यात हैं। उन्होंने न केवल मरीजों का डर दूर किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि चिकित्सा का धर्म जीवन बचाना और मरीज को न्यूनतम कष्ट देना है।
सभी परिवारों ने डॉ. भाटी और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया है। आज ये 9 माताएं और उनके नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं, जो चिकित्सा जगत के लिए एक प्रेरणादायक खबर है।



