एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: मर्ज बदला, इलाज बदला, पर नहीं बदली दवाओं की लिस्ट; जेब खाली करने को मजबूर आम आदमी
जयपुर। राजस्थान सरकार भले ही प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हर मरीज को ‘नि:शुल्क दवा’ उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन धरातल पर हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। सरकारी अस्पताल परिसरों के ठीक बाहर फलता-फूलता एक हजार करोड़ रुपए का निजी दवा कारोबार सरकार की योजनाओं की पोल खोल रहा है।
📋 समय बदला पर नहीं बदली ‘EDL’
पड़ताल में सामने आया है कि इस पूरी समस्या की जड़ राज्य की आवश्यक दवा सूची (EDL) है। अस्पतालों में आज भी वही दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं जो सालों पहले सूची में शामिल की गई थीं। चिकित्सा पद्धतियों में बदलाव और नई बीमारियां आने के बाद भी नई व स्पेशलिस्ट दवाओं को इस सूची में अपडेट नहीं किया गया। नतीजतन, डॉक्टर जो जरूरी दवाएं लिखते हैं, वे अक्सर सूची से बाहर होती हैं और मरीजों को उन्हें निजी स्टोर से खरीदना पड़ता है।
💸 निजी बाजार में 100% तक महंगी दवाएं
निजी बाजारों में मरीजों को वही दवाएं 80 से 100 प्रतिशत तक महंगी कीमतों पर मिलती हैं। कैंसर, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी लंबी बीमारियों में यह खर्च हजारों से सीधे लाखों रुपए तक पहुंच जाता है। नि:शुल्क योजना होने के बावजूद मरीजों का ‘आउट-ऑफ-पॉकेट’ खर्च कम नहीं हो पा रहा है।
🛑 फाइलों में अटके ‘पीएम जन औषधि केंद्र’
समाधान के तौर पर सरकार ने प्रदेश में करीब 5 हजार जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा था, ताकि सस्ती जेनेरिक दवाएं मिल सकें। लेकिन प्रशासनिक मंजूरी और जगह आवंटन के नाम पर फाइलें महीनों से अटकी पड़ी हैं। आलम यह है कि जहां ये केंद्र होने चाहिए, वहां से मरीजों को सीधे बाहर के निजी मेडिकल स्टोर पर भेजा जा रहा है।
🔔 विशेषज्ञों की मांग: नियमित समीक्षा हो
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा का कहना है कि EDL की नियमित समीक्षा कर नई दवाओं को शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल प्रभारी इन केंद्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्हें केंद्र सरकार दवाइयां उपलब्ध कराती है।
जब तक सरकारी तंत्र अपनी पुरानी सूचियों और अटकी फाइलों को नहीं सुधारेगा, तब तक ‘नि:शुल्क दवा’ का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।
Circle News Network के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।
सकल न्यूज के लिए गुमान सिंह राव की रिपोर्ट। जय हिंद।



