जयपुर/चित्तौड़गढ़: राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय ड्रग माफिया की कमर तोड़ दी है। एटीएस और एएनटीएफ ने एक संयुक्त ‘शिकार’ करते हुए चार साल से फरार और चार एनडीपीएस मामलों में वांछित 25,000 रुपये के ईनामी बदमाश कैलाश चंद को दबोच लिया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री दिनेश एम.एन. के मार्गदर्शन और एटीएस महानिरीक्षक श्री विकास कुमार के निर्देशन में टीम ने जिस तरह से जाल बिछाया, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
महीने में 4 दिन काम, बाकी दिन ऐशो-आराम: कमीशन का ‘किंगपिन’ नीमच (MP) का रहने वाला 52 वर्षीय कैलाश चंद कोई आम तस्कर नहीं था। वह नशे की दुनिया का ऐसा ‘बिचौलिया’ था जिसने न कभी अफीम उगाई और न ही खुद सप्लाई की, लेकिन तस्करों और किसानों के बीच की कड़ी बनकर अकूत संपत्ति जमा कर ली।
- मोटा मुनाफा: वह एक किलो अफीम/डोडा पोस्त बिकवाने पर 400-500 रुपये कमीशन लेता था। एक डील में कम से कम एक क्विंटल माल होता था, यानी बैठे-बिठाए 40 से 50 हजार रुपये की कमाई।
- रईसी ठाठ: आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह महीने में सिर्फ 3-4 डील करता था और 2-3 लाख रुपये कमाकर बाकी 26 दिन ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। उसका सिद्धांत था- “हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए।”
इतना शातिर कि 11 साल में सिर्फ 4 मुकदमे कैलाश की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 2014 से इस धंधे में है, लेकिन 11 सालों में उस पर सिर्फ 4 केस दर्ज हुए।
- सप्लाई का तरीका: वह पूरी गाड़ी भरने के बजाय घरेलू सामान के बीच में छोटी थैलियों में नशा छिपाकर भेजता था। पुलिस चेकिंग में गाड़ी को घरेलू सामान समझकर छोड़ दिया जाता था।
- साथियों ने खोले राज: वह तभी पकड़ में आया जब 2019 और 2022 में उसके द्वारा माल भिजवाए गए साथी (लेखराज, पप्पाराम, विजयसिंह) पुलिस के हत्थे चढ़े और उसका नाम उगला।
वोटर लिस्ट में नाम कटने का डर और पुलिस का जाल जब सीधे तरीके से यह शातिर हाथ नहीं आया, तो ANTF ने इसकी ‘राजनैतिक महत्वाकांक्षा’ का फायदा उठाया। पुलिस को पता चला कि कैलाश का नाम दो जगह वोटर लिस्ट में है और वह राजनीति में रूचि रखता है।
- फर्जी सर्वे टीम: ANTF के जवान ‘SIR टीम’ बनकर उसके घर पहुंचे और परिवार से कहा कि “कैलाश का नाम दो जगह है, अगर खुद फॉर्म नहीं भरा तो दोनों जगह से नाम कट जाएगा।”
- जाल में फंसा शिकार: परिवार ने बताया कि वह कल शाम 5 बजे गांव के बाहर होटल पर आएगा। बस फिर क्या था, वक्त मुकर्रर हुआ और पुलिस ने होटल पर घेराबंदी कर इस ‘किंगपिन’ को दबोच लिया।
ऑपरेशन का नाम: ‘धरातुंडिका’ क्यों? इस ऑपरेशन का नामकरण भी बेहद दिलचस्प रहा। बौद्ध धर्म में ‘माउंट कैलाश’ को पृथ्वी का नाभि-स्थल माना जाता है। नाभि (तुंडिका) और पृथ्वी (धरा) को मिलाकर नाम दिया गया- ‘धरातुंडिका’। क्योंकि आरोपी कैलाश भी एक जगह बैठकर नशे के कारोबार को सेंट्रलाइज (केंद्रीकृत) कर रहा था।
इनका कहना है: एटीएस महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई में शामिल ANTF मुख्यालय और चित्तौड़गढ़ चौकी की टीम को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की है कि अपराधी या नशे से जुड़ी सूचना 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9001999070 पर दें, पहचान गुप्त रखी जाएगी।



