मेघावा परिक्षेत्र से 400 किसानों की हुंकार, 27 अक्टूबर को चितलवाना में निर्णायक ‘महापड़ाव’
(वॉइस ओवर पैटर्न): जालोर की धरती पर किसान अपनी तकदीर खुद लिखने को तैयार हैं! 27 अक्टूबर को चितलवाना में होने वाला संयुक्त किसान मोर्चा का महापड़ाव अब सिर्फ धरना नहीं, बल्कि अपने हक के लिए जल, जमीन और न्याय की लड़ाई का शंखनाद बन गया है। मेघावा समेत दर्जनों गांवों के किसानों का गुस्सा चरम पर है, जिनकी जमीनें तो नहरों के लिए ले ली गईं, लेकिन सिंचाई के पानी से उन्हें वंचित रखा गया है।
रानीवाड़ा (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क)।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर 27 अक्टूबर को चितलवाना में होने वाले किसान महापड़ाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस निर्णायक संघर्ष में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 25 अक्टूबर को मेघावा परिक्षेत्र में मोर्चा की टीम पहुंची, जहां किसानों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई।
मोर्चा का स्पष्ट एजेंडा:
मोर्चा के जिलाध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब संघर्ष का समय आ गया है। उन्होंने सभी किसानों को महापड़ाव में शामिल होने का माकूल न्यौता दिया। मोर्चा टीम के सदस्य विरद सिंह चौहान ने बताया कि महापड़ाव का मुख्य एजेंडा स्पष्ट है:
- आदान अनुदान और लंबित फसल बीमा क्लेम का तत्काल भुगतान।
- नर्मदा नहर सिस्टम की पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करना।
- बिजली विभाग की मनमानी और अन्य स्थानीय समस्याओं का समाधान।
“जमीन हमारी, पानी नहीं हमारा?”
मेघावा परिक्षेत्र के किसानों का दर्द सबसे बड़ा है। वीरावा, मणोहर, मेघावा, कूंडकी, अगड़ावा जैसे कई गांवों के किसानों ने आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके खेतों से नहरें निकाल दी गईं और सरकार ने उनकी जमीनें भी ले लीं, परंतु उन्हें आज तक नहर के कमाण्ड क्षेत्र से नहीं जोड़ा गया है। इस ज्यादती के चलते वे सिंचाई के पानी से वंचित हैं, जबकि नहर उनके खेतों के बीच से होकर गुजर रही है।
मेघावा क्षेत्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष जगदीश सियाक ने बताया कि कमाण्ड से जोड़ने हेतु वे लंबे समय से संघर्षरत हैं, लेकिन सुनवाई न होने से क्षेत्र में अभूतपूर्व आक्रोश व्याप्त है।
मेघावा ने भरी हुंकार:
इस संघर्ष में अपनी ताकत दिखाने के लिए मेघावा क्षेत्र के किसानों ने एकजुट होकर यह ऐलान किया कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 27 अक्टूबर को चितलवाना में होने वाले महापड़ाव में कम से कम 400 किसानों की संख्या में भाग लेंगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व सरपंच प्रतिनिधि सांवलाराम सियाक, सेवानिवृत्त शिक्षक मालाराम सियाक, किशनाराम, मोहनलाल, पेमाराम सारण, सुख राम लोल, लादूराम जाणी, जयराम सियाक, किशनलाल जाणी, भूराराम भील, गिरधारी लाल सुथार सहित कई किसान नेता और जागरूक ग्रामीण उपस्थित रहे। किसानों का यह शक्ति प्रदर्शन सरकार और प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर सकता है।



