आचार्य रविरत्नसूरीजी के सानिध्य में संपन्न हुई ऐतिहासिक संयम दीक्षा, परिवार के ७वें सदस्य ने अंगीकार किया जैन शासन का गौरवमयी साधु जीवन
संयम पथ पर कदम बढ़ाते ही जब मुमुक्षु हर्षित को रजोहरण ‘ओगा’ प्रदान किया गया, तो वे खुशी से झूम उठे। वैराग्य के रंग में रंगे हर्षित को नाचते देख पांडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आँखें सजल हो उठीं। निकटवर्ती सिरोड़ी गाँव में रेखा बेन एवं जितेन्द्र कुमार संघवी के सुपुत्र हर्षित ने आज शुभ मुहूर्त में सांसारिक मोह-माया को सदा के लिए अलविदा कह दिया। आचार्य रविरत्नसूरीजी, आचार्य जयेशरत्नसूरीजी एवं पन्यास प्रवर वैराग्यरत्नविजयजी महाराज की पावन निश्रा में यह भव्य दीक्षा महोत्सव संपन्न हुआ। मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के बीच आचार्य रविरत्नसूरीजी महाराज ने हर्षित को दीक्षा प्रदान कर ‘केश लोचन’ की कठिन विधि करवाई।
खानदानी वैराग्य की अनूठी मिसाल
मुमुक्षु हर्षित का संयम पथ पर बढ़ना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि उनके परिवार की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा है। वे अपने परिवार के ७वें सदस्य हैं, जिन्होंने भौतिक संसार को त्यागकर जैन शासन की सेवा का मार्ग चुना है। ११ बहनों के इस इकलौते और लाडले भाई के चेहरे पर दीक्षा के समय एक गजब का ‘तेज’ और शांति दिखाई दे रही थी। इस दीक्षा के साथ ही सिरोड़ी गाँव के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, क्योंकि हर्षित इस धरा से संयम पथ पर बढ़ने वाले १८वें साधु बन गए हैं। साधु वेश धारण कर जब वे क्रिया मंडप में पहुंचे, तो समाजजनों ने अक्षत से उनका भव्य वधामणा कर प्रथम वंदन किया। आचार्यश्री ने उनके नए नामकरण की घोषणा “मुनिराज हीरगुणरत्नविजयजी” के रूप में की, जिससे पूरा पांडाल करतल ध्वनि से गूंज उठा। वे मुनिराज जिनवररत्नविजयजी महाराज के शिष्य बने हैं।

सिरोड़ी गाँव का गौरवमयी इतिहास
समारोह में विशेष रूप से पधारे आचार्य लब्धिवल्लभसूरीजी महाराज साहेब ने नूतन मुनिराज हीतगुणरत्नविजय को विशेष आशीर्वाद दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सिरोड़ी गाँव त्याग और वैराग्य की पावन भूमि है। अब तक यहाँ के ५२ जाबाँजों ने संयम मार्ग अपनाकर जैन शासन का जो गौरव बढ़ाया है, वह पूरे समाज के लिए अद्वितीय और प्रेरणादायी है।

भव्य रस्में और विदाई के भावुक पल
दीक्षा विधि के प्रारंभ होने से पूर्व मुमुक्षु हर्षित को उनके माता-पिता और परिजनों ने विजय तिलक लगाकर भावभीनी विदाई दी। हाथी, घोड़ों, और बैंड-बाजे के साथ हर्षित का ऐतिहासिक वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकाला गया। शांतिलालजी पूनमचंदजी संघवी परिवार ने इस जीवित महोत्सव पर बड़ी संख्या में पधारे साधु-साध्वी भगवंतों का गुरुपूजन कर ‘कामली’ अर्पण की।
इस दौरान मांगलिक लाभ लेने के लिए श्रावकों में होड़ सी मच गई:
- प्रथम तिलक का लाभ: श्रीमती वजुबाई चुन्नीलालजी परिवार (सिरोड़ी वाले)।
- नामकरण घोषित करने का लाभ: संघवी शांतिलालजी पूनमचंदजी हीरा पन्ना परिवार (सिरोड़ी)।
- उपकरण और पात्र वोहराने का लाभ: समाज के विभिन्न श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक लिया।

छः रिपालित संघ की घोषणा और चातुर्मास विहार
इस पावन अवसर पर सिरोड़ी के श्रीमती तुलसी बेन गेनमलजी परिवार ने तलाजा तीर्थ से पालीताणा तीर्थ तक भव्य ‘छः रिपालित संघ’ निकालने की घोषणा की और आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। दीक्षा कार्यक्रम की पूर्णाहुति के बाद आचार्य रविरत्नसूरीजी ने अपने शिष्य मंडल के साथ अहमदाबाद के लिए विहार किया, जहाँ इस वर्ष उनका चातुर्मास अहमदाबाद के न्यू वासणा क्षेत्र में होने जा रहा है। आयोजक शांतिलालजी पूनमचंदजी संघवी परिवार ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए श्री संघ एवं समस्त ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।



