ग्रामीण आजीविका पर हमले के खिलाफ 10 जनवरी से शुरू होगा आंदोलन, जिलाध्यक्ष रमिला मेघवाल करेंगी नेतृत्व
जालोर। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका पर किए जा रहे कथित हमलों और मनरेगा के मूल स्वरूप को बदलने के प्रयासों के विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जालोर जिला कांग्रेस कमेटी ने "मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन" शुरू करने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन 10 जनवरी से 6 फरवरी तक जिले भर में विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाएगा।
आंदोलन की रूपरेखा: उपवास से लेकर कलेक्ट्रेट घेराव तक
जिला प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य काम के अधिकार की रक्षा करना और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करवाना है। आंदोलन का कार्यक्रम निम्नानुसार रहेगा:
- 10 जनवरी 2026: राजीव गांधी भवन, जालोर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अभियान का औपचारिक शुभारंभ और नए प्रस्तावित कानून के दुष्प्रभावों का खुलासा।
- 11 जनवरी 2026: डॉ. भीमराव अम्बेडकर सभा स्थल पर पार्टी नेताओं, प्रतिनिधियों और श्रमिकों का एक दिवसीय सामूहिक उपवास।
- 12 से 29 जनवरी 2026: जिले की ग्राम पंचायत स्तर पर चौपालों और जनसंपर्क के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करना।
- 30 जनवरी 2026: ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों द्वारा शांतिपूर्ण धरने और संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा।
- 31 जनवरी से 06 फरवरी 2026: जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय के समक्ष विशाल धरना प्रदर्शन। धरने के समापन पर केंद्र के VB-GRAM-G विधेयक को वापस लेने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
क्यों हो रहा है विरोध? मनरेगा बनाम नया VB-GRAM-G एक्ट
कांग्रेस का आरोप है कि नया विधेयक मनरेगा की आत्मा को खत्म कर रहा है। प्रवक्ता कुम्पावत ने दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया:
| विशेषता | मूल मनरेगा (UPA सरकार) | नया VB-GRAM-G अधिनियम (प्रस्तावित) |
| काम की गारंटी | प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार का वैधानिक अधिकार। | काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करने का प्रयास। |
| मजदूरी अंशदान | केंद्र सरकार लगभग 90% वहन करती है। | केंद्र का अंशदान घटाकर मात्र 60% किया गया। |
| वित्तीय बोझ | राज्यों पर कम आर्थिक भार। | राज्यों और श्रमिकों पर अधिक वित्तीय बोझ डाला गया। |
| निर्णय प्रक्रिया | ग्राम सभाओं और पंचायतों का सशक्तिकरण। | निर्णय प्रक्रिया का पूर्णतः केंद्रीकरण। |
| नाम और पहचान | महात्मा गांधी के नाम से श्रम की गरिमा जुड़ी है। | गांधी जी का नाम हटाया जाना ग्राम स्वराज के मूल्यों पर हमला। |
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर संकट
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा प्रतिवर्ष 5-6 करोड़ परिवारों को रोजगार देता है, जिसमें 60% हिस्सेदारी महिलाओं की है। यह कानून मजबूरी के पलायन को रोकता है और दलितों, आदिवासियों एवं वंचितों को सीधा लाभ पहुँचाता है। नए कानून के तहत कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और बजट में सीमित आवंटन से ग्रामीण संकट बढ़ेगा और मजदूरों का दमन होगा।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां