राजस्थान में अब पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की राह आसान हो सकती है।
सरकार दो से ज्यादा बच्चों वाले जनप्रतिनिधियों पर लगी रोक हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
इस पर मुख्यमंत्री स्तर तक चर्चा हो चुकी है, और दोनों विभाग — पंचायतीराज व स्वायत्त शासन — से अनौपचारिक रिपोर्ट मांगी गई है।
🔹 मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बड़ा बयान
शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा —
“जब सरकारी कर्मचारियों पर तीन संतान की पाबंदी हटा दी गई, तो जनप्रतिनिधियों के साथ भेदभाव क्यों?
उन्हें भी वही छूट मिलनी चाहिए।”
मंत्री के इस बयान ने पंचायतीराज राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
उन्होंने साफ कहा कि कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए।
अगर एक वर्ग को राहत मिली है, तो दूसरा वंचित क्यों रहे?
🔹 सीएम स्तर पर चर्चा और राय मंथन
खर्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर पहला दौर की चर्चा हो चुकी है।
अब राज्य सरकार विभिन्न संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से राय लेकर
अंतिम निर्णय जल्द लेने की दिशा में बढ़ रही है।
🔹 30 साल पुराना कानून अब बदलने की तैयारी
राजस्थान में यह पाबंदी 1994-95 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के समय लगाई गई थी।
इसके तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर कोई व्यक्ति पंचायत या निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता था।
यहां तक कि चुनाव जीतने के बाद तीसरा बच्चा होने पर पद से हटाने का भी प्रावधान था।
अब, तीन दशक बाद सरकार इस नियम को शिथिल करने पर विचार कर रही है।
🔹 कर्मचारियों को पहले ही मिल चुकी है छूट
सरकारी कर्मचारियों पर यह पाबंदी पहले से लागू थी —
तीसरा बच्चा होने पर प्रमोशन रोकने और कंपलसरी रिटायरमेंट तक के नियम बनाए गए थे।
लेकिन 2018 में तत्कालीन सरकार ने इन नियमों में राहत दी,
और अब वही तर्क जनप्रतिनिधियों के पक्ष में उठाया जा रहा है।
🔹 विधानसभा में भी उठ चुका मुद्दा
चित्तौड़गढ़ के निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी
पहले ही विधानसभा में इस भेदभाव का विरोध कर चुके हैं।
उनका कहना है —
“जब सांसद और विधायक के लिए ऐसी कोई रोक नहीं,
तो पंचायत प्रतिनिधियों पर यह पाबंदी क्यों?”
🔹 सरकार ने दिए संकेत — जल्द आ सकता है बड़ा फैसला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार दो संतान की बाध्यता हटाने के प्रस्ताव पर
जनमत लेने और विधिक राय मंगाने की प्रक्रिया में है।
यदि सहमति बनी तो जल्द ही नया संशोधन लाया जा सकता है।
📍नया दौर शुरू होने जा रहा है — अब शायद पंचायत का नेतृत्व तय करेगा अनुभव, न कि बच्चों की गिनती।
– जयपुर सर्कल रिपोर्ट | सर्कल न्यूज़ स्टाइल







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