सात दिन में अस्थायी मरम्मत का आश्वासन, स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा नवीनीकरण का कार्य
रानीवाड़ा। क्षेत्र के हिरपुरा गांव से गुजरात बॉर्डर स्थित मण्डारडी चौकी तक जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाने के विरोध में गुरुवार को स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क के नवीनीकरण की मांग को लेकर मौके पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से गुजरना अब किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा हो गया है।
हादसों को न्योता देते गहरे गड्ढे, पदयात्रियों की बढ़ी चिंता धरना-प्रदर्शन के दौरान गांग सरपंच प्रतिनिधि राधेश्याम चौधरी, गोविन्द गोस्वामी एवं रमेश देवासी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क पर जगह-जगह इतने गहरे गड्ढे हो चुके हैं कि वाहन चालकों, विशेषकर दुपहिया वाहन स्वामियों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। वर्तमान में बारिश के मौसम के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे राहगीरों को सड़क की गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता और आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों ने चेताया कि आगामी दिनों में गुजरात से सुंधा माताजी एवं लोकदेवता बाबा रामदेवरा के दर्शन के लिए हजारों की तादाद में पदयात्री इसी मार्ग से होकर गुजरेंगे। अगर समय रहते सड़क का सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया, तो पदयात्रियों के साथ कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने दिया आश्वासन, तब खुला जाम सड़क मार्ग पर ग्रामीणों के धरने और भारी विरोध-प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की टीम तुरंत हरकत में आई और अमले के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांग को जायज मानते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि आगामी सात दिनों के भीतर सड़क के इन जानलेवा गड्ढों को भरवाकर अस्थायी मरम्मत का कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा, ताकि आवागमन सुचारु और सुरक्षित हो सके।
इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि इस पूरी सड़क के स्थायी नवीनीकरण का विस्तृत प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। बजट की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिलते ही यहां नए सिरे से सड़क निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। इस सकारात्मक आश्वासन और विभागीय मुस्तैदी के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया।



