रानीवाड़ा में एसडीएम को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन; खेजड़ी काटने पर 7 साल की सजा और 3 लाख जुर्माने की पैरवी
रानीवाड़ा। राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण और अवैध कटाई को रोकने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने हुंकार भरी है। सोमवार को ‘गुरु जम्भेश्वर शिक्षण एवं पर्यावरण सेवा संस्थान रानीवाड़ा’ और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने बीकानेर में चल रहे आमरण अनशन को समर्थन देते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) रानीवाड़ा को सौंपा । इस ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से खेजड़ी संरक्षण के लिए कठोर वन्य संरक्षण कानून बनाने की पुरजोर मांग की गई है ।
कड़े प्रावधानों की मांग: जब्त वाहन नहीं होगा मुक्त
संस्थान की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में खेजड़ी की कटाई को रोकने के लिए निम्नलिखित कड़े प्रावधानों का प्रस्ताव रखा गया है:
- कठोर कारावास: खेजड़ी काटने वाले अपराधियों के लिए न्यूनतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान हो ।
- भारी आर्थिक दण्ड: सजा के साथ-साथ दोषी पर 3 लाख रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जाए ।
- वाहन राजसात: खेजड़ी की गीली लकड़ी का परिवहन करने वाले वाहनों को तुरंत जब्त कर राजसात किया जाए और उन्हें किसी भी अदालती प्रक्रिया से मुक्त न किया जाए ।
- उच्च स्तरीय जांच: इन प्रकरणों की जांच RPS स्तर के अधिकारी से कराने और विशेष अदालतों में सुनवाई की मांग की गई है ।
औद्योगिक इकाइयों पर ’10 गुना’ वृक्षारोपण की शर्त
ज्ञापन में सोलर प्लांट और औद्योगिक गतिविधियों पर निशाना साधते हुए कहा गया कि भविष्य में किसी भी लीज से पूर्व भूमि का भौतिक सत्यापन और “जीयो टैगिंग” अनिवार्य हो । साथ ही, पूर्व में काटी गई खेजड़ी की क्षतिपूर्ति के रूप में संबंधित कंपनियों से 10 गुना पौधे लगवाकर उन्हें बड़ा करने की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है । इसके लिए जिला व उपखण्ड स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाने का सुझाव दिया गया है जिनमें पर्यावरण प्रेमियों को भी शामिल किया जाए ।
प्रमुख लोगों की रही उपस्थिति
ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्र के अनेक जागरूक नागरिक और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। मुख्य रूप से पूर्व प्रधान नरेन्द्र बिश्नोई, वकील मोहनलाल, हेमाराम जांगू, परस राम ढाका, पी सी ढाका, और अमर सिंह सेवाडा ने सक्रिय भागीदारी निभाई और खेजड़ी को बचाने के संकल्प को दोहराया।
इनके अलावा बाबूलाल, मोहन, गंगाराम, किशनाराम, गणपत दास वैष्णव, राकेश कुमार जांगू, मदन खिलेरी, प्रकाश गीला और नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और पर्यावरण संस्थान के सदस्य मौजूद थे ।



