जालौर/भीनमाल। कहते हैं कि संकल्प की तपिश अगर सूरज जैसी हो, तो थार के रेगिस्तान की तपती रेत भी सफलता का मार्ग नहीं रोक पाती। जालौर जिले के छोटे से गाँव ‘रंगाला’ की पावन जन्मभूमि से निकलकर डॉ. उत्तम परमार ने एक ऐसी इबारत लिखी है, जो आज प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गई है। यह कहानी केवल एक डॉक्टर बनने की नहीं, बल्कि विज्ञान की उस सबसे जटिल और आधुनिक ‘एटॉमिक’ विधा को साधने की है, जहाँ पहुँचने का साहस कम ही लोग जुटा पाते हैं।
नींव संस्कारों की, उड़ान सपनों की
डॉ. उत्तम परमार [पीपा क्षत्रिय] के पिता, कालू राम जी परमार (A.En, JVDNL, सांचोर), ने उत्तम के भीतर बचपन से ही संघर्ष और शिक्षा के बीज बो दिए थे। सांचोर के सोलर इंटरनेशनल स्कूल से कक्षा 7वीं तक की पढ़ाई के बाद, उत्तम ने जोधपुर का रुख किया। ‘आवर लेडी ऑफ पिलर कॉन्वेंट स्कूल’ से 12वीं में 86.6% अंक लाकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी मंजिल साधारण नहीं होने वाली।

AIIMS का किला फतेह और ‘एटॉमिक हीलर’ बनने का जुनून
डॉक्टर बनना एक सपना होता है, लेकिन AIIMS जैसे संस्थान में प्रवेश एक साधना है। उत्तम ने अपनी एकाग्रता से AIIMS प्रवेश परीक्षा में देश भर में OBC कैटेगरी में 70वीं रैंक प्राप्त कर सबको चौंका दिया। AIIMS जोधपुर से MBBS की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने NEET PG की कठिन परीक्षा में 3526वीं रैंक प्राप्त की।
जहाँ अक्सर छात्र पारंपरिक मेडिकल शाखाओं की ओर भागते हैं, वहीं उत्तम ने ‘न्यूक्लियर मेडिसिन साइंस’ को चुना। यह चिकित्सा जगत का वह आधुनिक रूप है जहाँ रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु ऊर्जा का उपयोग शरीर के भीतर जाकर कैंसर, थायरॉयड और हृदय रोगों की सटीक पहचान और उपचार के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, उत्तम अब एक ‘एटॉमिक हीलर’ के रूप में चिकित्सा विज्ञान की नई सीमाओं को लांघ रहे हैं।

सामाजिक विरासत: सफलता का पर्याय बना परिवार
सफलता की यह कड़ी केवल डॉ. उत्तम तक सीमित नहीं है। इसी परिवार के रिश्तेदार डॉ. भागीरथराम परिहार रानीवाड़ा भी सपत्नीक वर्तमान में चंडीगढ़ से सुपर स्पेशलिस्ट की डिग्री (DM/MCh) हासिल कर रहे हैं। पीपा क्षत्रिय समाज से 3- 3 चिकित्सकों का देश के सर्वोच्च संस्थानों में सेवा देना इस समाज और क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तम सर्वोदय अस्पताल, फरीदाबाद (Delhi NCR) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और तीसरे राउंड के अपग्रेडेशन के साथ भविष्य की नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं।
युवाओं के लिए संदेश: भीड़ से अलग पहचानें अपनी राह
22 मार्च 1999 को जन्मे डॉ. उत्तम परमार की यह यात्रा सिखाती है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो गाँव की पगडंडियां भी सीधे महानगरों के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों तक ले जाती हैं। उनका चयन यह भी बताता है कि न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे उभरते क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत है तो ‘परमाणु’ जैसा अटूट विश्वास रखने की।
“रेगिस्तान के धोरों से निकलकर जब कोई युवा परमाणु ऊर्जा से रोगों को हराने का संकल्प लेता है, तो वह केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि अपनी पूरी जन्मभूमि का मान बढ़ाता है।”



