जालोर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आज जालोर जिला मुख्यालय पर “मनरेगा बचाओ संग्राम” की गूँज सुनाई दी। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जिलाध्यक्ष रमिला मेघवाल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट के समक्ष केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कांग्रेसजनों द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
“मनरेगा को खत्म करने का रचा जा रहा षड़यंत्र” — वैभव गहलोत
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता एवं लोकसभा प्रत्याशी वैभव गहलोत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
- साजिश का आरोप: केंद्र सरकार एक सोची-समझी रणनीति के तहत मनरेगा के मूल स्वरूप को नष्ट कर रही है।
- वित्तीय भार: नए कानून से राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ाया गया है, जिससे भविष्य में इस योजना के बंद होने का खतरा है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट: डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना के मूल ढांचे से छेड़छाड़ ग्रामीण आजीविका को संकट में डाल रही है।
- बजट में उपेक्षा: केंद्र के हालिया बजट में राजस्थान की एक भी मांग पूरी नहीं हुई है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में ‘वोट की चोट’ जरूरी — सुखराम विश्नोई
पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-चौपाल तक जाकर केंद्र सरकार की विफलताओं को उजागर करें। उन्होंने कहा कि मनरेगा के ढांचे में बदलाव से गरीब और आम आदमी को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसका जवाब केवल लोकतांत्रिक तरीके से दिया जा सकता है।
वैधानिक गारंटी को खत्म करने का प्रयास — रमिला मेघवाल
जिलाध्यक्ष रमिला मेघवाल ने तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2005 में लागू मनरेगा कानून प्रत्येक ग्रामीण को रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है। नया VB-GRAM-G अधिनियम इस गारंटी को ही समाप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि योजना से ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाना श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश है।
कांग्रेस की एकजुटता और आगामी रणनीति
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आगामी पंचायतीराज चुनावों के लिए एकजुट होने का संकल्प लिया। इस दौरान पूर्व मंत्री पुखराज पाराशर, पूर्व जिलाध्यक्ष भवरलाल मेघवाल सहित जिले के तमाम वरिष्ठ नेता, ब्लॉक अध्यक्ष और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
संचालन: जिला प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। धरने में भारी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।



