जयपुर/रानीवाड़ा | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने संगठन में नई जान फूंकते हुए तीन महत्वपूर्ण प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और रणनीतिक नाम भरत सराधना देवासी का है, जिन्हें विमुक्त, घुमंतू व अर्ध घुमंतू जाति (DNT) प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रानीवाड़ा तहसील के करवाड़ा निवासी भरत सराधना की इस नियुक्ति को मारवाड़ और देवासी समाज को कांग्रेस के पाले में लाने के एक बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों खास है भरत सराधना की नियुक्ति?
- गुटबाजी से कोसों दूर: राजस्थान कांग्रेस में अक्सर होने वाली 'पायलट बनाम गहलोत' की राजनीति के बीच भरत सराधना एक निष्पक्ष चेहरा बनकर उभरे हैं। उन पर किसी विशेष गुट की छाप नहीं है, बल्कि उनके सीधे संबंध दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व (AICC) से हैं।
- संगठनात्मक अनुभव: सराधना पूर्व में NSUI के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं और कई जिलों के प्रभारी के रूप में अपनी क्षमताएं साबित कर चुके हैं। DNT समाज को एकजुट करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है।
- मजबूत पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि: उनके पिता एक प्रतिष्ठित समाजसेवी और राजस्व निरीक्षक रह चुके हैं। उनके भाई वर्तमान में भीनमाल में BEEO के पद पर कार्यरत हैं, जबकि कोरा सरपंच खेमजी देसाई उनके नजदीकी संबंधी हैं। रानीवाड़ा के विधायक रतन देवासी के साथ सामाजिक तालमेल पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

दो अन्य प्रकोष्ठों में भी नियुक्तियां
पार्टी ने संगठन को मजबूती देने के लिए दो अन्य प्रकोष्ठों की कमान भी सौंपी है:
- आशीष पाल पाडावत: खनन विकास एवं उत्थान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष।
- विक्रम स्वामी: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष।
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क विशेष: देवासी समाज को साधने की चेष्टा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रानीवाड़ा और भीनमाल बेल्ट में देवासी समाज का बड़ा प्रभाव है। भरत सराधना को यह जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने आगामी चुनावों से पहले जातियों के बिखराव को रोकने और निष्ठावान युवा कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। डोटासरा के इस 'ऑफिस ऑर्डर' ने न केवल संगठन में खाली पदों को भरा है, बल्कि कार्यकर्ताओं में यह संदेश भी दिया है कि काम करने वाले चेहरों को अब सीधे दिल्ली के निर्देश पर तरजीह दी जा रही है।







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