रानीवाड़ा, जालोर। रानीवाड़ा से रामसीन वाया भीनमाल राज्य मार्ग के नवीनीकरण के बाद कल से शुरू हुई टोल वसूली ने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी रोष पैदा कर दिया है। रविवार को यह गुस्सा सड़कों पर दिखा, जब स्थानीय ग्रामीणों ने टोल नाके पर धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। ग्रामीणों की मांग है कि स्थानीय निवासियों को टोल से पूर्णतः मुक्ति मिलनी चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है और पूर्व विधायक सहित कई स्थानीय नेता ग्रामीणों के समर्थन में उतर आए हैं।

स्थानीय बनाम टोल: आखिर क्यों भड़का है आक्रोश?
स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल वसूली उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। रविवार को नेपालसिंह देवल और आज महेंद्रसिंह कागमाला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कोटड़ा टोल नाके पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कोटड़ा टोल के चारों तरफ उनकी काश्तकारी ज़मीनें और ढाणियां स्थित हैं, जहाँ सैंकड़ों परिवार निवास करते हैं। ऐसे में बार-बार टोल चुकाना उनके लिए आर्थिक रूप से बोझिल है।
आंद्रेश्वर महादेव मंदिर: आस्था पर टोल का ग्रहण

विरोध का एक बड़ा कारण प्रसिद्ध शैवालय श्री आंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी है। यह मंदिर टोल नाके की परिधि में आता है। प्रत्येक सोमवार को हज़ारों की तादात में शिवभक्त दर्शन के लिए आते हैं। इन शिवभक्तों को अब हर बार टोल चुकाना पड़ेगा, जिससे उनकी आस्था यात्रा पर भी आर्थिक बोझ पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि टोल संचालकों को इस पर विशेष रियायत बरतनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला है।
नारायणसिंह देवल का हस्तक्षेप: कलेक्टर से सीधी बात, जयपुर जाने की तैयारी
ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और भीड़ को देखते हुए पूर्व विधायक एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नारायणसिंह देवल मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों और वाहन संचालकों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि टोल की वर्तमान स्थिति उनके लिए 'दो पाटों के बीच पिसने' जैसी है।
देवल ने तुरंत इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जालोर ज़िला कलेक्टर प्रदीप गवांडे को फ़ोन पर पूरी स्थिति से अवगत कराया। कलेक्टर ने सोमवार को स्वयं मौके पर आकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनने का आश्वासन दिया है। वहीं, पीडब्ल्यूडी विभाग के चीफ़ से संपर्क न हो पाने पर देवल ने कहा कि वह सोमवार को ही जयपुर जा रहे हैं। वहाँ वे विभागीय अधिकारी सहित मंत्री श्रीमती दियाकुमारी से मिलकर इस समस्या का कोई उचित रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे।
पूर्व मंत्री देवड़ा का 'फ़ॉर्मूला' और 10 किमी. परिधि का सुझाव

पूर्व विधायक देवल ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर को तुरंत कोटड़ा टोल नाके की 10 किमी परिधि में आने वाले गाँवों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान हो सके। कागमाला ग्राम पंचायत के सरपंच महेंद्रसिंह ने इस समस्या को "विकट" बताते हुए कहा कि टोल नाका गाँव से दूर होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि टोल की उपयुक्त जगह रानीवाड़ा शहर के पास या मालवाड़ा रेलवे ब्रिज के उस पार होनी चाहिए, ताकि कोई स्थानीय निवासी प्रभावित न हो। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि टोल वसूली में पूर्व मंत्री अर्जुनसिंह देवड़ा वाला फ़ॉर्मूला अपनाया जाना चाहिए, जिसमें स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
सोमवार को निर्णायक बैठक: समाधान की उम्मीद
नेपालसिंह देवल ने घोषणा की कि इस समस्या के समाधान के लिए सोमवार को आंद्रेश्वर महादेव मंदिर में दर्जनभर गाँवों के ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में पीडब्ल्यूडी विभाग, टोल ठेकेदार सहित ज़िला कलेक्टर के भी भाग लेने की उम्मीद है, ताकि समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान निकल सके।
विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
इस विशाल धरना प्रदर्शन में ठाकुर गजेंद्रसिंह मालवाड़ा, ठाकुर महेंद्रसिंह कागमाला, लक्ष्मण जोशी, लक्ष्मण सैन, नेपालसिंह, शक्तिसिंह मालवाड़ा, प्रतापसिंह देवल, चौकी प्रभारी प्रेमसिंह, कालू सिंह, जीवनसिंह सहित कई गणमान्य लोग और सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद की।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार को होने वाली बैठक और जयपुर में होने वाली मुलाक़ातें इस ज्वलंत मुद्दे पर क्या रंग लाती हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी जायज़ मांगें मानकर उन्हें इस अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाएगी।







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