सूत्र :- सांसद की मुकेश मोदी से मुलाकात पर अमित शाह खफा? ED ने 3676 संपत्तियों की नीलामी की ओर बढाया निर्णायक कदम; रिवाइवल की मांग बनाम रिकवरी की हकीकत
जालोर/सिरोही/जयपुर | 14,000 करोड रुपये के आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में अब एक साथ दो बडे धमाके हुए हैं। एक तरफ जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निवेशकों का पैसा लौटाने की दिशा में संपत्तियों के ‘वैल्यूएशन’ का मास्टर स्ट्रोक खेला है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में हुई एक सियासी मुलाकात ने दिल्ली तक हलचल मचा दी है।
सांसद की ‘जेल विजिट’ और दिल्ली की नाराजगी सर्कल न्यूज नेटवर्क को सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने हाल ही में जेल में बंद सोसाइटी के मुख्य संचालक मुकेश मोदी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात का एजेंडा ‘फंसे पैसे निकालने का रास्ता’ खोजना था।

- समर्थकों का लॉजिक: सोसाइटी समर्थकों ने सांसद से आग्रह किया था कि वे केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह से बात कर सोसाइटी को ‘रिवाइव’ (पुनर्जीवित) कराएं और नया बोर्ड गठित करें, ताकि कामकाज फिर शुरू हो सके।
- दिल्ली का रुख: हालांकि, सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह इस मुलाकात से खुश नहीं हैं। उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की है। केंद्र सरकार का स्पष्ट मानना है कि जांच एजेंसियां (ED, SFIO) अपना काम कर रही हैं और कानून के दायरे में ही समाधान निकलेगा, न कि बैकडोर बातचीत से।
ED का ‘एक्शन प्लान’: रिवाइवल नहीं, रिकवरी पर जोर सरकार की मंशा साफ है—सोसाइटी को फिर से खड़ा करने के बजाय, उसकी जब्त संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाया जाए। इसी दिशा में ED के जयपुर जोनल ऑफिस ने अब तक का सबसे ठोस कदम उठाया है।
- बडा आदेश: ED के सहायक निदेशक मुकेश कुमार ने 9 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर गुजरात के रजिस्टर्ड वैल्युअर अमित भट्ट को नियुक्त किया है।
- टारगेट: देश के विभिन्न राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, आदि) में जब्त 3676 अचल संपत्तियों का मूल्यांकन तत्काल प्रभाव से शुरू करने को कहा गया है। इन संपत्तियों की लिस्ट 11 नवंबर को ही सौंप दी गई थी।
- मायने: वैल्यूएशन का सीधा अर्थ है कि एजेंसियां अब नीलामी (Auction) की तैयारी में हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन संपत्तियों को बेचकर जो राशि मिलेगी, उसी से जालोर, सिरोही और पाली सहित देशभर के 21 लाख जमाकर्ताओं को भुगतान किया जाएगा।

घोटाले की ‘इनसाइड स्टोरी’ और अब तक का सफर ABP न्यूज के पत्रकार प्रसून वाजपेयी द्वारा किए गए भंडाफोड के बाद से यह साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह बिखर गया था।
- फंसा पैसा: 21 लाख निवेशकों के 14,000 करोड रुपये।
- जेल और मौत: सोसाइटी के डायरेक्टर्स लंबे समय से राजस्थान की जेलों में बंद हैं। उनकी जमानतें सुप्रीम कोर्ट तक से खारिज हो चुकी हैं। इसी दौरान एक डायरेक्टर वीरेंद्र मोदी की जेल में ही मृत्यु हो चुकी है।
- वर्तमान स्थिति: भारत सरकार ने रिटायर्ड IAS एच.एस. पटेल को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त कर रखा है। PMLA एक्ट 2002 के तहत ED और SOG लगातार शिकंजा कसे हुए हैं।
निष्कर्ष: एक तरफ सांसद की कोशिश सोसाइटी को ‘फिर से चलाने’ की है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय जांच एजेंसियां ‘संपत्ति बेचकर पैसा लौटाने’ के अंतिम चरण में हैं। अमित शाह की नाराजगी और ED का वैल्यूएशन ऑर्डर साफ संकेत दे रहा है कि सरकार ‘रिवाइवल’ के हवाई वादों के बजाय ‘रिकवरी’ के ठोस रास्ते पर आगे बढ चुकी है। अब देखना यह है कि वैल्यूएशन रिपोर्ट कितनी जल्दी आती है और निवेशकों के खाते में पैसा कब पहुंचता है।
नोट :- उपरोक्त जानकारी हमारे सिरोही के टीम लीडर और साथी के द्वारा प्रेषित की गयी है | इसके सबूत सर्कल न्यूज़ के पास उपलब्ध है|



