देश में बढ़ती सामाजिक दूरियों और मजहबी कड़वाहट के दौर में जालौर की फिजां में आज ‘मोहब्बत के शरबत’ की मिठास घोली गई। मौका था किसान केसरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट की 26वीं पुण्यतिथि का, जिसे जालौर के कांग्रेसियों ने केवल एक श्रद्धांजलि सभा तक सीमित न रखकर कौमी एकता और भाईचारे के एक बड़े संदेश में बदल दिया।
✦ भीषण गर्मी में ‘मोहब्बत’ की ठंडक
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव अमीन मोयला के संयोजन में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में राहगीरों और आमजन को गुलाबी तर-ब-तर ‘मोहब्बत का शरबत’ पिलाया गया। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से बेहाल लोग जब इस पंडाल के नीचे पहुंचे, तो उन्हें न सिर्फ गले को तर करने वाली ठंडक मिली, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला अपनत्व भी महसूस हुआ।

आयोजक अमीन मोयला ने कहा:
“आज देश को नफरत की नहीं, मोहब्बत की जरूरत है। स्वर्गीय पायलट साहब ने हमेशा दबे-कुचले, किसान और गरीब को गले लगाया। आज के इस माहौल में आपसी सौहार्द और प्रेम की इस मिठास को हर नागरिक तक पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।”
✦ दिग्गजों ने किया ‘किसान केसरी’ को नमन
इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत में कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय राजेश पायलट के चित्र पर सूत की मालाएं और पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके जुझारू व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि पायलट साहब राजनीति में शुचिता और गरीब-मजदूर की बुलंद आवाज के प्रतीक थे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ये रहे मौजूद:
- एआईसीसी सदस्य: जितेंद्र कसाना
- महिला कांग्रेस: प्रदेश सचिव कामिनी शर्मा
- सेवादल: जिलाध्यक्ष भेरूपाल सिंह
- अल्पसंख्यक विभाग: जिलाध्यक्ष जाकिर खान रंगरेज, प्रदेश संयोजक रज्जब खान खोखर, सलीम मोयला
- अन्य अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी: इकबाल खान कोटवाल, सुरेश मेघवाल (प्रदेश सचिव एससी विभाग), पुखराज माली (आरपीजीआरएस), समीर हाड़ा (एनएसयूआई), कयूम हाड़ा, चारुल शर्मा, रज्जाक मोयला, फकरुद्दीन मेहर, बंसी माली, मुस्ताक खान, जगदीश कुमार, अंबालाल माली (टैक्सी यूनियन अध्यक्ष) सहित मोंटू हाडा, मोहसिन खान और दर्जनों कार्यकर्ता।
✦ लिया सामाजिक एकता का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर वहां मौजूद सभी धर्म और वर्ग के लोगों ने एक सुर में देश की गंगा-जमुनी तहजीब को अक्षुण्ण रखने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह बनी कि सियासत चाहे जो मोड़ ले, आम इंसान के दिल में आज भी ‘मोहब्बत के शरबत’ का स्वाद बाकी है।



