जोधपुर, 04 अप्रैल 2025: राजस्थान के जालोर जिले में मेडिकल कॉलेज की बहुप्रतीक्षित परियोजना, जो राज्य सरकार की 2023 की बजट घोषणा में शामिल थी, विवादों के घेरे में आ गई है। समाजसेवी बलवंत राव द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका ने इस मुद्दे पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है।
याचिका में बलवंत राव ने यह तर्क दिया है कि मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं, जिसमें भूमि आवंटन, वित्तीय स्वीकृति, और निर्माण कार्य का आरंभ शामिल है। इसके बावजूद, दिसंबर 2024 में राज्य सरकार ने अचानक इस परियोजना को रोक दिया और जनवरी 2025 में वर्क ऑर्डर रद्द कर दिया। परियोजना से जुड़े ठेकेदार द्वारा सरकार पर 6.04 करोड़ रुपये की हर्जाने की मांग की गई है।
याचिका में जालोर दुर्ग पर सड़क निर्माण कार्य को रोकने का मुद्दा भी उठाया गया है। यह परियोजना, जो जिले के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से थी, भी तकनीकी खामियों का हवाला देकर रोक दी गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और स्थानीय आक्रोश पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में इन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया था। कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान भाजपा सरकार पर इन विकास कार्यों को रोकने का आरोप लगाया है और इसे जालोर की जनता के साथ अन्याय करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत ने बताया कि सरकार को इन कार्यों को पुनः आरंभ करने के लिए बार-बार अनुरोध किया गया है, लेकिन सरकार ने “तकनीकी खामियों” का सहारा लेकर परियोजनाओं को ठप कर दिया।
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। यह कदम जालोर जिले के विकास कार्यों को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं को बल देता है।
राज्य स्तरीय जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पाराशर बताते है की जालोर मेडिकल कॉलेज और दुर्ग सड़क निर्माण जैसी परियोजनाएं न केवल जिले की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और पर्यटन को भी प्रोत्साहन देती हैं। उम्मीद है कि अदालत का यह हस्तक्षेप जालोर के लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित होगा।



