जालोर के सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर विधानसभा मुख्य सचेतक ने कलेक्टर गवांडे को लिखा कड़ा पत्र; औचक निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
सर्किल न्यूज नेटवर्क
जालोर/जयपुर। 19 जून।
जिले के सरकारी अस्पतालों की सेहत खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। जनता को मुफ्त और सुलभ इलाज का दावा करने वाले दावों की जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल समय पर डॉक्टर गायब मिलते हैं। अधिकतर डॉक्टर अघोषित अवकाश पर रहते हैं या फिर ड्यूटी के वक्त ही अपने घरों पर धड़ल्ले से निजी प्रैक्टिस चमका रहे हैं। मुफ्त की मोटी सैलरी डकारने और गंभीर मरीजों, यहां तक कि डिलीवरी (प्रसूति) के केसों को भी सरकारी की जगह निजी अस्पतालों में रेफर करने की लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों के बाद अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
राजस्थान विधानसभा के सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने जालोर जिले के चिकित्सा तंत्र में फैली इस अव्यवस्था को लेकर जिला कलेक्टर प्रदीप गवांडे को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने कलेक्टर से साफ कहा है कि जिले के चिकित्सा तंत्र का समुचित सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी दफ्तरों से बाहर निकलें और अस्पतालों का औचक निरीक्षण करें।

गर्ग की चिट्ठी के 3 बड़े प्रहार: सुधरें, वरना नपेंगे!
मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने पत्र लिखकर कलेक्टर को तीन मुख्य बिंदुओं पर तत्काल एक्शन लेने को पाबंद किया है:
- 1. अघोषित छुट्टी और निजी प्रैक्टिस पर लगेगी लगाम: जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की 100% उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए कलेक्टर खुद और उपखंड स्तर के अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) करें। निरीक्षण के दौरान केवल हाजिरी ही नहीं, बल्कि जांच उपकरणों और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता को भी क्रॉस-चेक किया जाए।
- 2. दवा खत्म होने से पहले ही बजानी होगी घंटी: राज्य सरकार लगभग सभी दवाइयां और जांचें मुफ्त दे रही है। अब अस्पतालों के प्रभारी अधिकारियों को पाबंद किया जाएगा कि कोई भी दवा या सर्जिकल आइटम खत्म होने से पहले ही उसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दें, ताकि ऐन वक्त पर मरीज को बाहर की दवा न लिखनी पड़े। इसके साथ ही, अस्पताल समय के बाद भी कम से कम एक डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य होगी ताकि आपातकालीन मरीजों को भगवान भरोसे न रहना पड़े। आपात स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर को मौके पर बुलाने की व्यवस्था भी चाक-चौबंद करनी होगी।
- 3. 104 और 108 एम्बुलेंस की होगी समीक्षा: दुर्घटना, इमरजेंसी और प्रसूति (डिलिबरी) के मामलों में 104 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी, ताकि मरीज को अस्पताल पहुंचने में एक मिनट की भी अनावश्यक देरी न हो।
व्यवस्था में गुणात्मक सुधार जरूरी “राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को सहज और सुलभ चिकित्सा देने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही से जनता परेशान हो रही है। अगर इन व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से लागू किया गया, तो जालोर की चिकित्सा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।” — जोगेश्वर गर्ग, सरकारी मुख्य सचेतक, राजस्थान विधानसभा
अब देखना यह है कि मुख्य सचेतक के इस कड़े पत्र के बाद जालोर जिला प्रशासन और चिकित्सा महकमा नींद से जागता है या फिर ‘फ्री की सैलरी’ डकारने वाले रसूखदार डॉक्टरों का यह खेल यूं ही परदे के पीछे चलता रहेगा।



