प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के ‘डोर-टू-डोर’ अभियान की धूम; अपनों को गले लगाने की इस अनूठी परंपरा से गदगद हुए पुराने कार्यकर्ता
सर्किल न्यूज नेटवर्क
भीनमाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का भीनमाल दौरा इन दिनों मरुधरा की सियासत में जबरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है। राठौड़ द्वारा वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर उनसे सीधा संवाद करने और पुरानी यादों को ताजा करने के इस अनूठे अभियान का जनता और कार्यकर्ताओं के बीच बेहद पॉजिटिव रिस्पांस आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस जमीनी अभियान की जमकर तारीफ हो रही है। जानकारों का साफ कहना है कि सत्ता के शिखर पर रहकर भी अपनी जड़ों को न भूलना ही भाजपा की अटूट लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है।

जब पुराने सेनानियों ने ताजा कीं यादें, हुआ भव्य स्वागत
अपनी भीनमाल यात्रा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भाजपा के उस “फाउंडेशन पिलर” (आधार स्तंभ) के द्वार पहुंचे, जिन्होंने कभी विपरीत दौर में भाजपा के वैचारिक पौधे को सींचा था। राठौड़ भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गुमान सिंह राव के निवास स्थान पर ‘स्नेह मिलन’ के लिए पहुंचे। जैसे ही दो पुराने साथी मिले, वर्षों पुराने संघर्ष के दिन आंखों के सामने तैर गए, क्योंकि मदन राठौड़ खुद एक जमीन से जुड़े नेता हैं और उन्होंने गुमान सिंह राव के साथ एक जमाने में संगठन में साथ-साथ काम शुरू किया था।
इस आत्मीय मौके पर गुमान सिंह राव और उनके पुत्र भरत सिंह राव (वर्तमान जिला उपाध्यक्ष, भाजपा ओबीसी मोर्चा) ने प्रदेश अध्यक्ष का राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा पहनाकर और मालाओं से लादकर भव्य स्वागत किया।

दिग्गजों की मौजूदगी और ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का पावन संदेश
इस गौरवमयी पल के साक्षी बनने के लिए क्षेत्र के तमाम दिग्गज नेता और वरिष्ठ कार्यकर्ता उमड़ पड़े। इस अवसर पर जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी, भाजपा जिला अध्यक्ष जसराज राजपुरोहित, रानीवाड़ा के पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल, पूर्व जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह बोरली, पूर्व विधायक शंकर सिंह राजपुरोहित और विक्रम सिंह ईरानी सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस विशेष मिलन पर वरिष्ठ नेता गुमान सिंह राव ने मदन राठौड़ को आर्य समाज की मार्गदर्शक और पवित्र पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ भेंट की। राव ने प्रदेश अध्यक्ष से इस पावन ग्रंथ के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए भावी सियासत में राष्ट्रहित और जनसेवा की नई संभावनाएं तलाशने का विशेष निवेदन किया।

विपक्षी खेमे में मायूसी; कांग्रेस में दूर-दूर तक नहीं ऐसी परंपरा
इस दौरे ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भाजपा चुनाव दर चुनाव मजबूत क्यों होती जा रही है। संगठन के बुजुर्गों को ‘देव दुर्लभ’ मानकर उनके घर तक जाना और पैर छूकर आशीर्वाद लेना सिर्फ और सिर्फ भाजपा की कार्यसंस्कृति में ही दिखाई देता है। इसके विपरीत, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में इस तरह की जमीनी और आत्मीय परंपराओं का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं मिलता। कांग्रेस की यही आंतरिक दूरी और गुटबाजी उसे कमजोर करती है, जबकि भाजपा की अपनी जड़ों से यह अटूट कड़ियां उसे हर मोर्चे पर अजेय बनाती हैं।



