रानीवाड़ा, 01 अगस्त, 2025। श्री क्षत्रिय युवक संघ के माननीय संघप्रमुख श्री लक्ष्मण सिंह बैण्याकाबास ने गुजरात प्रवास के दौरान प्रांत रानीवाड़ा के गांव जाखड़ी में महत्वपूर्ण प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने रानीवाड़ा और सांचौर प्रांत के स्वयंसेवकों और समाज बंधुओं से मुलाकात कर संगठन की गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर गहन चर्चा की।
जालोर संभाग प्रमुख अर्जुनसिंह देलदरी ने बताया कि संघप्रमुख वर्तमान में सभी प्रांतों में स्वयंसेवकों से मिलने जा रहे हैं। इसी कड़ी में वे रानीवाड़ा प्रांत के जाखड़ी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ वर्षभर की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। दोपहर बाद, संघप्रमुख ने राजपूत कोटड़ी, जाखड़ी में रानीवाड़ा प्रांत के समाज बंधुओं के साथ एक विशेष बैठक की।

“संघ क्या है?” – संघप्रमुख का महत्वपूर्ण प्रश्न और ‘अधूरे अरमान’ का मर्म
बैठक में संघप्रमुख ने एक मार्मिक प्रश्न उठाया: “हमारा सबका दृष्टिकोण अलग-अलग है। हम सब क्षत्रिय युवक संघ को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं, लेकिन संघ क्या है? क्या हमने इसके बारे में जानने की कोशिश की?” उन्होंने पूज्य तनसिंह जी द्वारा रचित एक गीत “आराम कहाँ जीवन में अरमान अधूरे रह जाते हैं” का उल्लेख करते हुए उपस्थितजनों को चिंतन के लिए प्रेरित किया।
संघप्रमुख ने विस्तार से समझाया कि पूज्य तनसिंह जी ने किन “अरमानों” की बात की थी। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या पैसा कमाने से, बहुत अच्छा मकान बनाने से, या गाड़ी लेने से हमारे अरमान पूरे हो जाते हैं? यदि ये भौतिक उपलब्धियां ही अरमान हैं और वे अधूरे रह जाते हैं, तो फिर जीवन में आराम कहाँ? यह संबोधन संघ के मूल उद्देश्यों और वैचारिक आधार को पुनः स्थापित करने का एक प्रयास था, जिसमें उन्होंने भौतिकवादी लक्ष्यों से परे जाकर आत्मिक संतुष्टि और समाज सेवा के वास्तविक अरमानों पर जोर दिया।

श्री क्षत्रिय युवक संघ: एक परिचय
श्री क्षत्रिय युवक संघ एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1946 में पूज्य तनसिंह जी द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य क्षत्रिय समाज में नैतिक मूल्यों, चारित्रिक विकास और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है। संघ व्यक्तित्व निर्माण, सांस्कृतिक उत्थान और समाज सेवा के माध्यम से एक सशक्त और आदर्श समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करता है। यह संगठन अनुशासन, त्याग और सेवा को अपने मूल सिद्धांत मानता है, और युवाओं को इन मूल्यों के साथ जोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। संघ समय-समय पर विभिन्न शिविरों, बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है ताकि स्वयंसेवकों को वैचारिक रूप से मजबूत किया जा सके और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा सके।
इस अवसर पर छैलसिंह, शेर सिंह, माधुसिंह, श्रवणसिंह रतनपुर, महेंद्र सिंह कारोला, प्रेम सिंह अचलपुर, जेठु सिंह सिवाड़ा, पर्बत सिंह, विक्रम सिंह, महेंद्र सिंह, रेवत सिंह, गणपत सिंह, फुलसिंह, मुकनसिंह चेकला, छैलसिंह उचमत, गजेंद्र सिंह जाविया, उदयसिंह, छोटुसिंह, हनवंतसिंह, दुर्गसिंह, वीरमसिंह, कल्याणसिंह सुरावा, नेपालसिंह गोला, आदि सहित समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।



