• 3000 की आबादी पर अब ग्राम पंचायत में होंगे 7 वार्ड; जिला परिषद के लिए 4 लाख पर 17 वार्ड तय
• सरकार का नया गणित: वार्डों की संख्या हमेशा रहेगी विषम (Odd), कलेक्टर्स को प्रक्रिया शुरू करने के सख्त निर्देश
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर/जालोर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) का नक्शा अब पूरी तरह बदलने वाला है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 17 दिसंबर 2025 को एक अहम आदेश जारी करते हुए प्रदेश भर में वार्डों के पुनर्गठन और पुर्नसीमांकन की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से बदलती डेमोग्राफी और नई पंचायतों के गठन के बाद पैदा हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार ने यह बडा कदम उठाया है।
आबादी का नया ‘गणित’ जारी
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वार्डों का गठन जनसंख्या के आधार पर तय फार्मूले से होगा:
- ग्राम पंचायत: 3000 तक की जनसंख्या वाली ग्राम पंचायत में अब 7 वार्ड होंगे। यदि जनसंख्या 3000 से अधिक है, तो हर 1000 (या उसके भाग) की बढोतरी पर 2 अतिरिक्त वार्ड जोडे जाएंगे।
- पंचायत समिति: 1 लाख तक की जनसंख्या वाली पंचायत समिति में 15 वार्ड (निर्वाचन क्षेत्र) होंगे। यदि जनसंख्या 1 लाख से अधिक है, तो हर 15,000 की आबादी पर 2 वार्ड बढाए जाएंगे।
- जिला परिषद: 4 लाख तक की जनसंख्या वाली जिला परिषद में 17 वार्ड होंगे। 4 लाख से अधिक जनसंख्या होने पर प्रत्येक 1 लाख (या उसके भाग) पर 2 वार्ड की बढोतरी की जाएगी।
विषम संख्या का ‘लॉक’, सम संख्या ‘ब्लॉक’
सरकार ने इस बार स्पष्ट नियम बना दिया है कि किसी भी पंचायती राज संस्था में वार्डों की कुल संख्या हमेशा विषम (Odd Number) ही रखी जाएगी। यानी वार्डों की संख्या 7, 9, 11, 15, 17 आदि हो सकती है, लेकिन 8, 10 या 16 नहीं। इससे किसी भी प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान टाई होने की स्थिति से बचा जा सकेगा। साथ ही, सभी वार्डों की जनसंख्या यथासंभव समान अनुपात में रखने का प्रयास किया जाएगा।
क्यों पडी पुनर्गठन की जरुरत?
आदेश में बताया गया है कि पूर्व में वार्डों का पुनर्गठन हुए काफी समय बीत चुका है। इस दौरान जनसांख्यिकी (Demography) में भारी बदलाव आया है। हाल ही में कई नई पंचायतें बनी हैं, तो कई ग्रामीण क्षेत्र शहरी निकायों में शामिल हो गए हैं। जनप्रतिनिधियों और आम जनता से लगातार मिल रहे ज्ञापनों को देखते हुए यह पुनर्गठन अनिवार्य हो गया था।
अफसरों को मिली जिम्मेदारी
ग्राम पंचायतों के वार्डों के पुनर्गठन और प्रकाशन का जिम्मा संबंधित उपखण्ड अधिकारी (SDO) को सौंपा गया है। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद के वार्डों के पुनर्गठन का अंतिम प्रकाशन संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा। यदि पुनर्गठन के दौरान कोई वार्ड विभाजित होकर दो संस्थाओं में बंट जाता है, तो उसके लिए अलग से नया वार्ड गठित करने या मौजूदा वार्ड में शामिल करने का विकल्प भी दिया गया है।



