डबल इंजन सरकार के दावों की खुली पोल: सरकारी स्कूलों को दिए 50 करोड़ के दूध पाउडर का भुगतान अटका, चरमराई रानीवाड़ा सरस डेयरी; किसानों का गेट पर बेमियादी धरना शुरू
सर्किल न्यूज नेटवर्क
रानीवाड़ा (जालोर):
एक तरफ प्रदेश में खुद को 'डबल इंजन की सरकार' बताकर किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के कल्याण की ढेरों योजनाओं के कसीदे पढ़े जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। किसानों व पशुपालकों की अपनी संस्था रानीवाड़ा दुग्ध उत्पादक संघ (सरस डेयरी) का करीब 50 करोड़ रुपया खुद राजस्थान सरकार दबाकर बैठी है। मिड-डे मील योजना के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए सप्लाई किए गए दूध पाउडर की इस भारी-भरकम बकाया राशि को सरकार द्वारा जारी नहीं किए जाने से डेयरी का पूरा वित्तीय चक्र और पैसों की रोटेशन प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इसका सीधा खामियाजा आज जमीनी स्तर पर खून-पसीना बहाने वाले हजारों गरीब दुग्ध उत्पादकों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका दूध का भुगतान महीनों से अटका हुआ है। इसी आक्रोश के चलते सोमवार को रानीवाड़ा सरस डेयरी के मुख्य गेट के बाहर किसान सचिवों और दुग्ध उत्पादकों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है।
50 करोड़ की रिकवरी अटकी, बार-बार पत्र लिखने पर भी सरकार मौन: एमडी
वित्तीय संकट और भुगतान में हो रही देरी को लेकर रानीवाड़ा संघ के प्रबंध निदेशक (एमडी) भरत सिंह चौधरी ने डेयरी प्रबंधन का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि डेयरी ने मिड-डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों को लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य का दूध पाउडर उपलब्ध करवाया था। इस बकाए भुगतान को लेकर राजस्थान सरकार को बार-बार पत्राचार किया जा चुका है और उच्च स्तर पर रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं, लेकिन सरकार से यह 50 करोड़ रुपये की राशि अब तक जारी नहीं की गई है।
एमडी चौधरी ने कहा कि इतनी बड़ी पूंजी सरकार के पास अटक जाने के कारण डेयरी का नियमित फंड रोटेशन बिगड़ गया है। इसके बावजूद प्रबंधन अपने स्तर पर अधिकतम एक महीने के भीतर भुगतान जारी रखने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने डेयरी गेट पर शुरू हुए धरने पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे मामले और धरने के पीछे राजनीति खेली जा रही है।
किसानों का दो टूक जवाब: 'राजनीति नहीं, आजीविका का सवाल; मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना'
दूसरी ओर, डेयरी गेट के सामने धरने पर डटे जालोर-सिरोही जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां किसान सचिव यूनियन और किसानों ने एमडी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। किसानों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक स्टंट नहीं, बल्कि उनके पेट और परिवार के भरण-पोषण की सीधी लड़ाई है। समय पर भुगतान न मिलने से पशुओं के चारे, दवाओं, घरेलू खर्च और बैंक कर्जों की किस्तें चुकाना असंभव हो गया है।
आंदोलनरत किसानों और सचिवों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी न्यायोचित मांगें—जिसमें पिछला सारा बकाया भुगतान तत्काल करना, दूध खरीद भाव ₹8.70 से बढ़ाकर ₹9.50 प्रति फैट करना, समितियों का बकाया कमीशन जारी करना, संबल योजना का नियमित इंद्राज और रानीवाड़ा के लिए पूर्णकालिक स्वतंत्र एमडी की व्यवस्था करना शामिल है—पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका यह बेमियादी धरना अनवरत जारी रहेगा।
कभी एशिया में बजता था डंका, आज बंदी की कगार पर ऐतिहासिक डेयरी
रानीवाड़ा डेयरी का इतिहास करीब 50 से 60 साल पुराना और बेहद गौरवशाली रहा है। शुरुआती दौर में पंजाब के एक प्रतिष्ठित सिक्का परिवार द्वारा इस संयंत्र की नींव रखी गई थी। बाद में देश के औद्योगिक घराने 'टाटा ग्रुप' ने इसका संचालन अपने हाथों में लिया। इसके पश्चात इसे सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार को हैंडओवर किया गया और यह जालोर-सिरोही दुग्ध उत्पादक संघ के रूप में संचालित होने लगी।
एक समय ऐसा था जब रानीवाड़ा डेयरी की अत्यधिक आधुनिक और उन्नत मशीनरी की मिसाल पूरे एशिया में दी जाती थी और इसे एशिया की अग्रणी डेरियों में गिना जाता था। विडंबना देखिए कि जिस संस्थान ने पश्चिमी राजस्थान के लाखों पशुपालकों को आर्थिक संबल देकर श्वेत क्रांति की इबारत लिखी थी, आज वह सरकारी उदासीनता, अटके भुगतानों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के चलते भारी घाटे में घिरकर बंदी के कगार पर पहुंच चुकी है।
किसानों और सचिवों ने सरकार से मांग की है कि राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर तत्काल 50 करोड़ का बकाया जारी किया जाए, ताकि एशिया में कभी नाम कमाने वाली इस ऐतिहासिक धरोहर और उससे जुड़े हजारों अन्नदाताओं-पशुपालकों का भविष्य बर्बाद होने से बच सके।
धरने पर ये रहे मौजूद:
इस मौके पर यूनियन अध्यक्ष सैनीदान चारण, महासचिव किशनाराम (खेड़ा), कोषाध्यक्ष अशोक कुमार, कांतिलाल, सदाराम (कोटड़ा), भीमाराम (डेडवा), किशनाराम (पमाणा), हरनाराम, जामाराम (टोकरिया), जोराराम (करड़ा), रमेश कुमार (खारा), मसराराम, लसाराम (बड़लू), सावलाराम (सेवड़ा), करमाराम एवं राजुराम (अम्बतड़ा) सहित क्षेत्र की विभिन्न दुग्ध समितियों के कई सदस्य व पदाधिकारी मौजूद रहे।










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