नकद पुरस्कारों के साथ धावकों का हुआ सम्मान; 'रन फॉर स्वदेशी' बना आत्मनिर्भरता का महाकुंभ
रानीवाड़ा। मरूधरा की रेतीली धरती पर जब 200 से अधिक युवाओं के कदम एक साथ थिरके, तो मंजर केवल एक दौड़ का नहीं, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प का जीवंत प्रमाण बन गया। रानीवाड़ा के हृदय स्थल पर आयोजित 'रन फॉर स्वदेशी' कार्यक्रम ने न केवल खेल भावना को जागृत किया, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अंतर्मन में स्वदेशी की अलख जगा दी।
इस विशाल आयोजन की कमान युवा नेता और संयोजक एडवोकेट गमन देवासी ने संभाली, जिनकी कुशल रणनीति और जमीनी पकड़ ने कार्यक्रम को एक उत्सव में तब्दील कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र के जनप्रिय नेता और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नारायण सिंह देवल ने शिरकत की।
देवल का ओजस्वी संबोधन: स्वदेशी से सजेगा 'विश्व गुरु' का भाल
पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल ने अपने उद्बोधन में स्वदेशी की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वदेशी केवल वस्तुओं का चयन नहीं, बल्कि एक विचार है जो हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्त करता है।
"एडवोकेट गमन देवासी और उनकी टीम ने युवाओं को स्वदेशी के इस सूत्र से जोड़कर राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण पेश किया है। जब हम अपनी मिट्टी में बनी वस्तुओं का उपयोग करते हैं, तो उस पैसे से हमारे ही देश के किसी गरीब का घर रोशन होता है। यही आत्मनिर्भरता की असली परिभाषा है।" — नारायण सिंह देवल, पूर्व विधायक
स्वदेशी: क्यों है यह समय की मांग?
वक्ताओं ने स्वदेशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि:
- आर्थिक संप्रभुता: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से रुपया देश के भीतर ही घूमता है, जिससे अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।
- कौशल विकास: यह 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को साकार कर ग्रामीण कारीगरों और लघु उद्योगों को संजीवनी प्रदान करता है।
- सांस्कृतिक पहचान: स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग हमारी परंपराओं और गौरवशाली विरासत को जीवित रखता है।
गमन देवासी की टीम का शानदार प्रबंधन
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक गमन देवासी और सहसंयोजक अनिल जोशी की जोड़ी ने युवाओं को एकजुट करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। गमन देवासी के नेतृत्व में युवाओं की इस रैली ने रानीवाड़ा के बाजार से गुजरते हुए प्रत्येक दुकानदार और ग्राहक को स्वदेशी अपनाने का मौन संदेश दिया।
मैदान से राष्ट्र निर्माण तक की दौड़
जिला संगठन प्रभारी महेंद्र मेघवाल और जिलाध्यक्ष जसराज पुरोहित ने विजेताओं को नकद राशि भेंट कर उनकी पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि यह दौड़ महज शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि भारत का युवा अब विदेशी ब्रांड्स के मोह को छोड़कर 'मेड इन इंडिया' का ध्वजवाहक बन चुका है।
गरिमामय उपस्थिति: समारोह के दौरान जिला संघचालक किशनलाल जोशी, मंडल अध्यक्ष रमेश आंजना, बीसीएमओ गणपतलाल चौधरी, तनु सिंह देवड़ा सहित भाजपा परिवार के कर्मठ कार्यकर्ता और खेल प्रेमी बड़ी संख्या में साक्षी बने। मंच का प्रभावी संचालन ताराचंद भारद्वाज ने किया।







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