अपशकुनों की अनदेखी और सुरक्षा में चूक ने डाला मेले में खलल; विधायक ने पूछा- घायल गरीब का खर्च कौन उठाएगा?
जालौर/रानीवाड़ा। क्षेत्र के प्रसिद्ध मेले में हुई अव्यवस्थाओं और हाल ही में घटित ‘घोड़ा दौड़’ हादसे को लेकर रानीवाड़ा विधायक रतन देवासी ने प्रशासन और मेला आयोजकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि 25 सालों के राजनीतिक जीवन में वे पहली बार व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि इस बार की लापरवाही ‘मानवता’ की सीमाओं को लांघ गई है।
## अपशकुनों की झड़ी: ‘न नारियल फूटा, न झंडा सही चढ़ा’
विधायक देवासी ने मेले की शुरुआत से ही हुई घटनाओं को ‘अशुभ संकेत’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस मेले का आगाज ही सही न हो, उसकी व्यवस्थाएं कैसे सही हो सकती हैं?
- नारियल का न फूटना: उद्घाटन के समय शुभ माना जाने वाला नारियल नहीं फूटा।
- झंडा फट जाना: ध्वजारोहण के दौरान झंडा फटकर अलग हो गया।
- बैल का बिदकना: पूजन के समय बैल बिदक गया, जिससे कई लोग गिर गए और भगदड़ जैसी स्थिति बनी।
विधायक ने स्पष्ट कहा, “जब शुरुआत में ही इतने संकेत मिल रहे थे, तो प्रशासन ने धार्मिक शुद्धि और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए? यह सीधे तौर पर आस्था और सुरक्षा से खिलवाड़ है।”
## खूनी खेल में बदला मेला: घोड़े ने चार को रौंदा
मेले के दौरान हुई पशु दौड़ (घोड़ा और ऊंट दौड़) में हुई लापरवाही पर विधायक सबसे ज्यादा आक्रोशित नजर आए। उन्होंने बताया कि इस हादसे में 4 लोग चोटिल हुए हैं, जिनमें से ‘धूमड़िया’ निवासी जबराराम जी राणा की हालत गंभीर है।
”मैंने स्वयं भीनमाल अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की है। किसी की पसलियां टूटी हैं, किसी का हाथ और किसी की कॉलर बोन (कंधे की हड्डी) में मल्टीपल फ्रैक्चर हैं। यह कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।”
## ‘मंच का मोह’ और प्रशासनिक संवेदनहीनता
विधायक ने अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब घायल गरीब व्यक्ति एम्बुलेंस में तड़प रहा था, तब अधिकारी और जनप्रतिनिधि मंच छोड़कर अस्पताल जाने के बजाय ‘इनाम बांटने’ और ‘वाह-वाही’ लूटने में मशगूल थे।
- जवाबदेही का अभाव: प्रशासन ने यह तक नहीं देखा कि घायल को किस अस्पताल रेफर किया गया है।
- सिर्फ दुकानें सजाईं, सुरक्षा नहीं: विधायक का आरोप है कि प्रशासन का ध्यान सिर्फ स्टॉल लगाने और दुकानों से राजस्व वसूलने पर रहा, जनता की सुरक्षा ‘राम भरोसे’ छोड़ दी गई।
## कड़क चेतावनी: जालौर बैठक में गूंजेगा मुद्दा
रतन देवासी ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि वे इस मामले को शांत नहीं बैठने देंगे।
- जांच की मांग: जालौर में होने वाली आगामी बैठक में वे मेला प्राधिकरण और सेफ्टी मेजर्स (Safety Measures) की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।
- मेडिकल खर्च की जवाबदेही: विधायक ने सवाल उठाया कि अस्पताल में भर्ती गरीब व्यक्ति के इलाज का खर्च कौन उठाएगा? क्या प्रशासन अपनी जेब से इसकी भरपाई करेगा?
- नियमों की धज्जियां: मेले के तय ‘नॉर्म्स’ के अनुसार न तो वहां पर्याप्त फायर ब्रिगेड थी और न ही समय पर एम्बुलेंस की सक्रियता।
## राजनीति नहीं, यह जनहित की ललकार है
विधायक ने अंत में कहा, “मैं किसी की आलोचना या बुराई के लिए नहीं बोल रहा। बीजेपी की सरकारें पहले भी रही हैं, लेकिन मैंने कभी व्यवस्थाओं पर सवाल नहीं उठाए। आज इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि जनता की जान खतरे में है। अगली बार अहम (Ego) छोड़कर सबको साथ बिठाकर व्यवस्थाएं सुधारनी होंगी, वरना जनता माफ नहीं करेगी।”
ब्यूरो रिपोर्ट: सर्कल न्यूज़ नेटवर्क (Circle News Network)



