जयपुर में शिक्षा विभाग का कड़ा फरमान; बिना अनुमति वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और बच्चों की जानकारी जुटाने पर लगेगा बैन, जानिए क्यों उठाए गए ये सख्त कदम
विपक्ष का तीखा हमला: शिक्षा विभाग के नए आदेश को बताया 'तुगलकी फरमान'
छात्रों की आवाज दबाने का हो रहा है प्रयास; विपक्ष ने चेताया— 'रोटी को जितना दबाओगे, उतनी ज्यादा फूलेगी'
बीकानेर/जयपुर: राजस्थान में स्कूली बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता को पुख्ता करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं. राज्य सरकार के 'इन लोको पैरेंटिस' (अभिभावक के समान दायित्व) के सिद्धांत और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन व निजता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए यह आदेश निकाला गया है. हाल के दिनों में स्कूलों परिसरों में अनधिकृत प्रवेश, बिना अनुमति वीडियो बनाने और बच्चों की व्यक्तिगत जानकारियों के संग्रहण के मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि बच्चों का किसी भी प्रकार का शोषण या उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन न हो.
क्यों जारी किए गए ये कड़े निर्देश? (मुख्य कारण)
- संवैधानिक और कानूनी अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक बालक को जीवन, गरिमा और निजता का अधिकार देता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने ऐतिहासिक निर्णयों में मौलिक अधिकार माना है.
- राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की नीति: एनसीपीसीआर की स्कूल सुरक्षा नीति और दिशा-निर्देश इस बात पर जोर देते हैं कि प्रत्येक विद्यालय बच्चों को सुरक्षित, संरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण दे तथा शोषण व निजता के अतिक्रमण से बचाए.
- अवांछित हस्तक्षेप और सुरक्षा का जोखिम: स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के बेरोकटोक प्रवेश, अनधिकृत फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और बच्चों की पहचान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा और गरिमा पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका को रोकने के लिए यह निर्देश जरूरी हो गए थे.
निर्देशों की मुख्य बातें:
- बिना अनुमति प्रवेश वर्जित: प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा, केवल अधिकृत शासकीय अधिकारी इसके अपवाद होंगे.
- विजिटर रजिस्टर अनिवार्य: प्रत्येक आगंतुक को प्रवेश से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि दर्ज करनी होगी.
- संवेदनशील क्षेत्रों में पाबंदी: शिक्षक या अधिकृत अधिकारी के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान या शौचालय जैसे क्षेत्रों में नहीं जा सकेगा.
- मीडिया और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक: प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी.
नियम तोड़े तो होगी सीधी कानूनी कार्रवाई और पॉक्सो की धमकी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति प्रवेश करता है, परिसर छोड़ने से मना करता है, अनधिकृत वीडियोग्राफी का प्रयास करता है या कार्य में बाधा डालता है, तो प्रधानाचार्य तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित करेंगे. ऐसे मामलों में स्थिति और तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), किशोर न्याय अधिनियम, 2015, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और अन्य प्रचलित कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.
रोटी को जितना दबाओगे, उतनी ज्यादा फूलेगी'
जयपुर:
राजकीय विद्यालयों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक और वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों पर सियासत गरमा गई है। एक तरफ जहां सरकार इसे बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता से जुड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इस आदेश को कड़े शब्दों में खारिज करते हुए इसे 'तुगलकी फरमान' करार दिया है।
विपक्ष का कहना है कि यह आदेश सीधे तौर पर छात्रों के हक की आवाज को दबाने और स्कूलों में हो रही कमियों पर पर्दा डालने का प्रयास है। सियासी हल्कों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार इस तरह के पाबंदियों भरे आदेश जारी करके लोकतांत्रिक असंतोष को कुचलना चाहती है।
'रोटी को जितना दबाओगे, उतनी फूलेगी'
राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि छात्रों के अधिकारों पर इस तरह के कड़े प्रतिबंध लगाने से आक्रोश कम होने के बजाय और अधिक बढ़ेगा। विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि— “रोटी को जितना दबाओगे, उतनी ज्यादा फूलनी निश्चित है।” छात्र शक्ति को इस तरह के आदेशों से लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
सुर्खियों में क्यों हैं प्रदेश के छात्र?
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से राजस्थान के सरकारी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में छात्र विभिन्न स्थानीय और अकादमिक समस्याओं को लेकर मुखर नजर आ रहे हैं। प्रदेश के कई इलाकों में छात्र संघ चुनावों की बहाली, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के रिक्त पद और अन्य छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन देने का दौर जारी है। ऐसे संवेदनशील माहौल के बीच शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल परिसरों में बाहरी व्यक्तियों, मीडिया और अनधिकृत गतिविधियों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ाने वाले इस नए फरमान ने छात्रों और विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और बड़ा मुद्दा थमा दिया है।









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