ऐसे हुआ साइबर हमला: PM KISAN.apk का खेल, पुलिस की फुर्ती और तकनीक का कमाल
जालोर, 12 जुलाई 2025: साइबर ठगी का एक बड़ा मामला जालोर में सामने आया, जहां एक शख्स के बैंक खाते से मालवेयर के जरिए 1.5 लाख रुपये उड़ा लिए गए। लेकिन, जालोर साइबर क्राइम पुलिस थाने की त्वरित कार्रवाई और पीड़ित की सूझबूझ से 30 मिनट के भीतर 1 लाख रुपये की राशि को फ्रीज करवा लिया गया। यह घटना साइबर फ्रॉड के खिलाफ “गोल्डन आवर्स” में शिकायत दर्ज कराने की अहमियत को रेखांकित करती है।

क्या था पूरा मामला?
शांति नगर कॉलोनी, जालोर के निवासी खेतपाल परिहार पुत्र डायाराम ने 11 जुलाई 2025 को शाम 6:10 बजे साइबर क्राइम पुलिस थाना जालोर में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर उनके बैंक खाते से 50-50 हजार रुपये के तीन ट्रांजेक्शन यानी कुल 1,50,000 रुपये ट्रांसफर होने के मैसेज मिले हैं। यह पता चलते ही उन्होंने फौरन बैंक जाकर अपने खाते में बची हुई रकम को परिवार के अन्य सदस्यों के खातों में ट्रांसफर करवाया। इसके तुरंत बाद, खेतपाल परिहार ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराई और फिर बिना देर किए साइबर थाना जालोर पहुंच गए।
पुलिस की फुर्ती और तकनीक का कमाल
शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना जालोर की टीम फौरन हरकत में आई। पुलिस अधीक्षक, जालोर, ज्ञानचन्द्र यादव के निर्देश पर, आरपीएस रामप्रताप सिंह और साइबर थाने की टीम ने शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की। महज 30 मिनट के भीतर, टीम ने तकनीकी विश्लेषण और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करके पीड़ित के खाते से ट्रांसफर किए गए 1 लाख रुपये की राशि को हॉल्ड करवा दिया। जिन संदिग्ध बैंक खातों में राशि ट्रांसफर हुई थी, उनकी पहचान करके उन्हें फ्रीज करवा दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बाकी बची हुई राशि को भी पीड़ित को वापस दिलाने के लिए आगे की कार्यवाही जारी है।

ऐसे हुआ साइबर हमला: PM KISAN.apk का खेल
साइबर क्राइम एक्सपर्ट टीम ने पीड़ित खेतपाल परिहार का मोबाइल फोन चेक किया तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। उनके मोबाइल में “PM KISAN.apk” नामक एक मालवेयर फाइल इंस्टॉल थी। यह मालवेयर फाइल इतनी खतरनाक थी कि इसने पीड़ित के मोबाइल के एसएमएस बॉक्स और कॉल लॉग की परमिशन ले ली थी। इसका मतलब यह था कि पीड़ित के मोबाइल पर आने वाले हर एसएमएस और कॉल अपने आप अज्ञात मोबाइल नंबरों पर फॉरवर्ड हो रहे थे।
यही कारण था कि जब पीड़ित के बैंक खाते से राशि ट्रांसफर करने के लिए इंटरनेट बैंकिंग के ओटीपी आए, तो वे सीधे साइबर ठगों तक पहुंच गए। ठगों ने इन ओटीपी का इस्तेमाल करके खेतपाल परिहार के बैंक खाते से अनाधिकृत ट्रांजेक्शन किए और 1.50 लाख रुपये संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर लिए। यह घटना दर्शाती है कि मोबाइल में अनजाने ऐप्स या फाइलों को डाउनलोड करना कितना खतरनाक हो सकता है।
जिला पुलिस की आम जनता से अपील: साइबर क्राइम से बचाव के उपाय
साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, जालोर जिला पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:
- अज्ञात APK फाइल से बचें: किसी भी व्यक्ति के मोबाइल पर व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य किसी माध्यम से प्राप्त होने वाली किसी भी फाइल को, जिसके फाइल नाम के अंत में “.apk” लिखा हो, उसे डाउनलोड न करें और तुरंत डिलीट कर दें। ये अक्सर मालवेयर हो सकते हैं।
- अनावश्यक ऐप्स इंस्टॉल न करें: अपने मोबाइल फोन पर मौजूद अनावश्यक ऐप्स को इंस्टॉल न करें। खासकर, किसी के द्वारा रेफर किए गए ऐप को बिना सोचे-समझे इंस्टॉल न करें और ऐप द्वारा मांगी जाने वाली अनावश्यक परमिशन न दें।
- ऑटो-डाउनलोड बंद करें: अपने मोबाइल में मौजूद सभी ऐप्स के लिए ऑटो-डाउनलोड ऑप्शन को बंद रखें। किसी भी फाइल को सत्यापन के बाद ही डाउनलोड करें।
- ऐप परमिशन की समीक्षा करें: अपने मोबाइल में मौजूद सभी मोबाइल ऐप्स से संबंधित दी हुई परमिशन का नियमित रूप से अवलोकन करें और केवल उन्हीं परमिशन को स्वीकृत करें जो संबंधित ऐप के लिए वास्तव में जरूरी हों।
- संदिग्ध URL और विज्ञापनों से बचें: किसी भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त होने वाले अनजाने यूआरएल पर क्लिक न करें। इन ऐप्स में दिखाई देने वाले विज्ञापन बैनर पर भी क्लिक न करें और न ही खुलने वाले फॉर्म भरें। ये अक्सर फिशिंग या मालवेयर फैलाने के लिए होते हैं।
- मजबूत पासवर्ड और टू-स्टेप वेरिफिकेशन: अपने मोबाइल में मौजूद सभी ऐप्स से संबंधित यूजर लॉगिन पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें। पासवर्ड सामान्य और प्रचलित नहीं होने चाहिए; उनमें न्यूमेरिक, अल्फाबेटिक और सिंबॉलिक कॉम्बिनेशन होने चाहिए ताकि वे मजबूत बनें। साथ ही, टू-स्टेप वेरिफिकेशन को हमेशा चालू रखें, क्योंकि यह सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ता है।
- साइबर क्राइम की तुरंत शिकायत: यदि आपके साथ कोई साइबर क्राइम या धोखाधड़ी की घटना होती है, तो बिना देर किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर लॉगिन करके तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। “गोल्डन आवर्स” (पहले कुछ घंटे) में की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
- आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें: गूगल आदि सर्च इंजन पर किसी भी कस्टमर केयर का नंबर खोजते समय हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें। फर्जी वेबसाइटें अक्सर ठगों द्वारा बनाई जाती हैं।
- अनजान कॉल/मैसेज/लिंक को नजरअंदाज करें: अनजान कॉल, मैसेज या लिंक को नजरअंदाज करें और उन्हें अपनी डिवाइस से हटा दें।
यह घटना एक महत्वपूर्ण सबक है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। जालोर पुलिस की त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है और यह आम जनता के लिए एक संदेश है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत कार्रवाई करना कितना महत्वपूर्ण है।



