5 आपराधिक मामले दर्ज; आरोपियों से मोबाइल, एटीएम कार्ड और चेक बुक बरामद।
जालोर। राजस्थान पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं) के निर्देशानुसार जालोर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ शुरू किया है. पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह इंदौलिया के नेतृत्व में जिले भर में उन ‘म्यूल खाताधारकों’ और बिचौलियों पर शिकंजा कसा जा रहा है, जो चंद रुपयों के लालच में साइबर ठगों को अपने बैंक खाते और सिम कार्ड मुहैया कराते हैं.
इस कार्रवाई के दौरान अब तक कुल 05 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं और 03 मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने इनके पास से 02 मोबाइल फोन, 03 एटीएम कार्ड, 01 चेक बुक और 02 पैन कार्ड भी बरामद किए हैं.
घटना का विस्तृत विवरण: ऐसे बिछाया गया ठगी का जाल
| मामला | आरोपी का विवरण | अपराध का तरीका |
| 01 (साइबर थाना) | शंकरलाल पुत्र हंसाराम सरगरा (28), निवासी मालपुरा, उम्मेदपुर. | शंकरलाल ने महज 10,000 रुपये के कमीशन के लालच में नारायणलाल के माध्यम से अपनी बैंक पासबुक, एटीएम, चेक बुक और लिंक सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए थे. जांच के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है. |
| 02 (कोतवाली जालोर) | राकेश कुमार पुत्र जेठाराम माली (21), निवासी ताशखाना बावड़ी, जालोर. | राकेश कुमार ने 40,000 रुपये के भारी कमीशन के बदले बिचौलिए के जरिए अपना बैंक खाता साइबर ठगी की राशि प्राप्त करने के लिए उपलब्ध करवाया था. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. |
| सहयोगी आरोपी | नारायणलाल पुत्र सवराम प्रजापत (32), निवासी सुभाषनगर, जालोर. | यह आरोपी खातों की व्यवस्था करने और बिचौलिए की भूमिका निभाने में संलिप्त पाया गया. |
पुलिस की अपील: ‘थोड़ा सा लालच बना सकता है साइबर अपराधी’
जिला पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम या सिम कार्ड उपयोग के लिए न दें. कमीशन के लालच में आकर अपने दस्तावेज दूसरों को देना आपको भी अपराधी बना सकता है. यदि आपने गलती से ऐसा किया है, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं.
कार्यवाही टीम:
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में कोतवाली थानाधिकारी देवेंद्र सिंह, सांचौर थानाधिकारी नेमाराम, सरवाना थानाधिकारी मोहनलाल सहित साइबर सेल के एएसआई कमलेश कुमार और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा.



