जोधपुर: मरुधरा में आदिवासियों ने अपने हक के लिए आवाज बुलंद की है। जोधपुर संभाग के आदिवासी भील समुदाय ने सरकारी नौकरियों में स्थानीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए 'रेगिस्तान जनजाति विशेष क्षेत्र' (DTSA) को लागू करने की मांग उठाई है। जालोर से राम कमल भील ने धरियावद विधायक थावरचंदजी को एक मांग पत्र सौंपा है, जिसमें समुदाय के आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया गया है।

नौकरी में बाहरी लोगों का कब्जा
मांग पत्र में कहा गया है कि आजादी के बाद से जोधपुर संभाग के एक भी स्थानीय आदिवासी का चयन प्रशासनिक सेवाओं में नहीं हुआ है। इसके अलावा, अन्य सरकारी भर्तियों में 95 से 98 प्रतिशत पद बाहरी संभाग के उम्मीदवारों को मिलते हैं। यहाँ तक कि RAS और RJS जैसी भर्तियों में तो यह आंकड़ा 100 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। मांग पत्र में यह भी बताया गया है कि हाल ही में हुए पेपर लीक की घटनाओं के कारण स्थानीय उम्मीदवारों का चयन और भी कम हो गया है।
डीटीएसए ही एकमात्र समाधान
समुदाय का मानना है कि टीएसपी (जनजाति उप-योजना क्षेत्र) की तर्ज पर डीटीएसए लागू करना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। इस व्यवस्था से स्थानीय आदिवासी भील युवाओं को उनका हक मिल पाएगा। मांग पत्र में इस मांग को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत संविधान सम्मत बताया गया है।

क्या मिलेगा हक?
भील समुदाय ने पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा इस मांग को नीतिगत मानने और पिछली सरकार द्वारा मारवाड़ क्षेत्रीय विकास बोर्ड के गठन का भी हवाला दिया है। अब देखना यह होगा कि इस नई हुंकार पर सरकार का क्या रुख रहता है और क्या मरुधरा के आदिवासियों को उनका हक मिल पाता है।
संविधान सम्मत है मांग
राम कमल भील ने अपनी मांग को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत संविधान सम्मत बताया है, जो कि सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अनुमति देता है। उन्होंने पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा इस मांग को नीतिगत मानने और पिछली सरकार द्वारा मारवाड़ क्षेत्रीय विकास बोर्ड के गठन का भी हवाला दिया है। इस मांग का उद्देश्य यह है कि स्थानीय आदिवासी भील युवाओं को उनका हक मिल सके और वे मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
पेपर लीक ने बढ़ाई मुश्किलें
मांग पत्र के अनुसार, हाल ही में हुए पेपर लीक घटनाओं ने स्थानीय उम्मीदवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पिछली राजस्थान पुलिस, पटवारी, वीडीओ और शिक्षक भर्तियों में उनका चयन नगण्य रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए, भील समुदाय ने टीएसपी (जनजाति उप-योजना क्षेत्र) की तर्ज पर डीटीएसए (डेजर्ट ट्राइबल स्पेशल एरिया) लागू करने की मांग की है।







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