जालोर 2 अप्रेल। एसीबी जालोर की टीम द्वारा 17 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में 9 आरोपियों के विरूद्ध एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया गया।
सर्व शिक्षा अभियान के समावेशित शिक्षा कार्यक्रम के तहत भ्रष्टाचार का गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिससे दृष्टिबाधित बच्चों को सहायक उपकरण प्रदान करने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। यह मामला जालोर जिले का है, जहाँ वर्ष 2007-08 के दौरान दृष्टिबाधित बच्चों के लिए चश्मा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
भ्रष्टाचार का स्वरूप: एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) के अनुसार, सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्म चौधरी चश्माघर सांचौर के मालिक गणेशराम चौधरी के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों में दृष्टिबाधित बच्चों की संख्या को वास्तविक संख्या से अधिक दिखाया गया ताकि अधिक चश्मे वितरित करने का दावा करके सरकारी धन का अनुचित उपयोग किया जा सके। इस प्रक्रिया में सरकार को ₹3,98,053.50 का वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि फर्म मालिक को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।
आरोपियों की सूची: जांच के बाद एसीबी ने नौ व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत माननीय विशेष न्यायालय, पाली में चालान पेश किया। ये आरोपी हैं:
- श्यामलता थालिया (सहायक परियोजना समन्वयक, समावेशित शिक्षा कार्यक्रम प्रभारी)
- गणेशराम चौधरी (चौधरी चश्माघर के प्रोपराइटर)
- मनजीराम औदिच्य (बीईईओ और बीआरसीएफ)
- आसुराम बिश्नोई (संदर्भ केंद्र सहयोगी)
- कानाराम पंवार (बीआरसीएफ)
- झूमरलाल पालीवाल (बीआरसीएफ)
- तेजाराम बिश्नोई (बीआरसीएफ)
- राजूशेख (सीआरसीएफ)
- प्रवीण विश्नोई (आरपी सर्व शिक्षा अभियान)
मामले की गंभीरता: यह मामला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग को दर्शाता है, बल्कि यह उन दृष्टिबाधित बच्चों के अधिकारों का भी हनन है जिन्हें सही तरीके से सहायता प्रदान की जानी चाहिए थी। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को लाभ प्रदान करना है।
वर्तमान स्थिति: एसीबी की जांच के बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय, पाली में चल रही है। आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं, और भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता की पुष्टि की जा रही है। इस मामले ने शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।







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