महात्मा गांधी की परपोती नीलाम्बेन पारीख का निधन महात्मा गांधी की परपोती, नीलाम्बेन पारीख, का 92 वर्ष की आयु में नवसारी, गुजरात में निधन हो गया। वह गांधीजी के सबसे बड़े पुत्र हरिलाल गांधी की पुत्री रामीबेन के पुत्र थीं। नीलाम्बेन पिछले 37 वर्षों से अपने बेटे डॉ. समीर पारीख के साथ नवसारी में रह रही थीं। सोमवार को वृद्धावस्था के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को वीरावाल श्मशान घाट पर हुआ, जिसमें शहर के कई बुद्धिजीवी और राजनीतिक नेता शामिल हुए।
जीवन और शिक्षा नीलाम्बेन का बचपन और शिक्षा मुंबई में हुई। वे कई वर्षों तक व्यारा के दक्षिणापथ विद्यालय की प्रधानाचार्या रहीं। 1988 से वे नवसारी में बस गई थीं। बचपन में मुंबई में रहते हुए उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई थी, और वे उनकी गोद में खेला करती थीं।
साहित्यिक योगदान नीलाम्बेन ने तीन पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘गांधीजी का खोया धन हरिलाल गांधी’ को काफी चर्चा मिली। यह पुस्तक उनके दादा हरिलाल गांधी के बारे में फैलाई गई गलत जानकारी को सुधारने का प्रयास थी। उन्होंने ‘गांधीजी के साथी’ और ‘जहाँ भी रहो, सुखद रहो’ शीर्षक से भी पुस्तकें लिखीं, जो पाठकों के बीच प्रसिद्ध हुईं।
समर्पित जीवन अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक नीलाम्बेन शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान करती रहीं। उनके निधन से समाज में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक और शैक्षिक शख्सियत का अंत हो गया।
