भामाशाहों के हौसले और सरकारी इमदाद से संवर रहा है १००० बीघा का संकल्प; रानीवाड़ा में हादसों के खौफ से मिलेगी मुक्ति, बेजुबानों को मिलेगा जीवनदान।
रानीवाड़ा। जब इरादे नेक और हौसले बुलंद हों, तो मरुभूमि की तपती रेत पर भी सेवा के सोत फूट पड़ते हैं। कुछ ऐसा ही भगीरथ प्रयास रानीवाड़ा तहसील के सांतरू गांव में साकार रूप ले रहा है। क्षेत्र की एकमात्र प्रस्तावित ‘नंदी शाला’ का शुभारंभ अब अति शीघ्र होने जा रहा है, जो न केवल बेसहारा घूम रहे सांडों के लिए एक सुरक्षित स्वर्ग साबित होगी, बल्कि रानीवाड़ा वासियों को रोजाना होने वाले जानलेवा हादसों से भी निजात दिलाएगी।
इस पुनीत कार्य को धरातल पर उतारने के लिए सत्यपुर गौ सेवा मंडल (सांचौर) का समर्पण और राजस्थान सरकार का संवेदनशील रुख वंदनीय रहा है। संस्था के निस्वार्थ सेवा भाव और सरकार द्वारा त्वरित गति से जारी ६२ लाख ८ हजार रुपए के बजटीय सहयोग के कारण ही आज सांतरू की १०० बीघा भूमि पर यह भव्य नंदी शाला आकार ले चुकी है। आम जनता इस बेमिसाल जुगलबंदी का दिल से आभार जता रही है।

सड़कों का ‘खौफ’ अब बनेगा इतिहास: चितलवाना जैसी दर्दनाक घटनाओं पर लगेगी लगाम
रानीवाड़ा और आसपास का इलाका पिछले लंबे समय से बेसहारा सांडों की आपसी लड़ाई और उनके द्वारा राहगीरों पर किए जाने वाले हमलों से त्रस्त है। अभी पिछले दिनों ही चितलवाना में एक बुजुर्ग को सांड ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। ऐसी हृदय विदारक घटनाएं आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। बाजार में व्यापार करना हो या राहगीरों को सड़क पार करनी हो, हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है। लेकिन अब सांतरू नंदी शाला के शुरू होने से इन आवारा नंदियों को एक ही छत के नीचे सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे हादसों का ग्राफ शून्य पर आ जाएगा और मानव जीवन सुरक्षित हो सकेगा।

क्या तैयार हुआ और क्या है बाकी?
१. बुनियादी ढांचा तैयार, विभागीय जांच पूरी
पशुपालन विभाग के डॉक्टर महेश शिंदे ने बताया कि नंदी शाला को शुरू करने को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी है। जिला प्रशासन ने अगली किस्त जारी करने से पहले मौके का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर लिया है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट राजस्थान सरकार को भेज दी है। जैसे ही दूसरी किस्त जारी होगी, बचे हुए काम पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर नंदी शाला का शुभारंभ बहुत जल्द किया जा सकता है।
२. क्या-क्या सुविधाएं बनकर हैं तैयार:
- चारदीवारी: १०० बीघा जमीन पर मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण पूर्ण।
- विशाल शेड: नंदियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए ५ बड़े छायादार शेड।
- जल व्यवस्था: ९ पानी के अवाडे (खेळ) और चारे के लिए पक्की गमान का निर्माण।
- भंडारण: चारे को सुरक्षित रखने के लिए विशाल चारा गोदाम बनकर तैयार।
- पानी की प्रचुरता: पानी की स्थाई समस्या के समाधान हेतु २ नलकूप (बोरिंग) खोदे जा चुके हैं, जिनमें पानी की कोई कमी नहीं है।
३. आगामी योजना: गंभीर बीमार नंदियों के लिए बनेगा ‘आईसीयू’
संस्था की योजना केवल नंदियों को रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें एक उच्च स्तरीय चिकित्सा तंत्र भी प्रदान करना है। व्यवस्थापकों के अनुसार, अगली किस्त मिलते ही यहां एक सर्वसुविधायुक्त आईसीयू (ICU) कक्ष बनाया जाएगा, ताकि दुर्घटनाग्रस्त या गंभीर रूप से बीमार नंदियों का सुचारू और त्वरित इलाज हो सके। इसके अलावा स्टाफ क्वार्टर और मुख्य कार्यालय भवन का निर्माण भी आगामी योजनाओं में शामिल है।
चुनौतियां भी अपार, मगर ‘सूर्य ऊर्जा’ से निकाला आत्मनिर्भरता का रास्ता
नंदी शाला के व्यवस्थापक गणपतलाल ने बताया कि इस पावन कार्य के सामने वन विभाग (Forest Department) की ओर से कुछ व्यावहारिक अड़चनें आ रही हैं। पहली समस्या रास्ते की है। चारा लाने वाले वाहनों के लिए जो रास्ता है, वह वन विभाग के क्षेत्राधिकार में आता है। यदि वन विभाग महज एक कच्चे रास्ते की अनुमति दे दे, तो नंदी शाला तत्काल शुरू की जा सकती है।
दूसरी बड़ी समस्या बिजली की थी। चारों तरफ वन विभाग की भूमि होने के कारण बिजली का परमानेंट कनेक्शन नहीं मिल पाया। वर्तमान में बोरिंग चलाने के लिए जनरेटर का उपयोग किया जा रहा है, जो प्रति घंटा ४ लीटर डीजल गटक जाता है। यह व्यवस्था बेहद खर्चीली साबित हो रही थी। लेकिन सत्यपुर गौ सेवा मंडल ने हार नहीं मानी! संस्था ने इसका आधुनिक विकल्प खोजते हुए ‘सौर ऊर्जा’ (सोलर प्लांट) लगाने का निर्णय लिया है। दो-चार दिनों में सोलर का काम शत-प्रतिशत पूरा हो जाएगा, जिससे नंदी शाला बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगी।
सरकारी अनुदान की व्यवस्था: केवल ‘नंदियों’ का होगा विशेष संरक्षण
राजस्थान सरकार इस नंदी शाला के संचालन में आर्थिक रीढ़ की हड्डी बनी हुई है। सरकारी नियमों के मुताबिक:
- वयस्क नंदी: ५० रुपए प्रति नंदी प्रतिदिन का अनुदान।
- छोटे नंदी (बछड़े): २५ रुपए प्रति नंदी प्रतिदिन का अनुदान।
विशेष बात: क्षेत्र में धानोल गौशाला जैसी संस्थाएं भी हैं, जहां नंदियों को रखा जाता है, लेकिन वहां क्षमता बेहद सीमित है। सांतरू की यह नंदी शाला पूरी तरह से ‘नंदियों’ के लिए ही समर्पित होगी, यहाँ गायों का प्रवेश नहीं होगा। यह क्षेत्र की इकलौती ऐसी अनूठी योजना है, जहां केवल सांडों को सुरक्षित और संवर्धित कर उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन दिया जाएगा।
स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन वन विभाग के साथ मिलकर रास्ते के विवाद को जल्द सुलझाएगा, ताकि इस अद्वितीय सेवा प्रकल्प का लाभ जल्द से जल्द समूचे रानीवाड़ा क्षेत्र को मिल सके।




