आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर 36 कौम के हजारों श्रद्धालु हुए शामिल, ओम् नमः शिवाय के जयघोष से गूंजा प्राचीन शैव मठ
सेवाडिया! आज आषाढ़ मास की पूर्णिमा, यानी गुरु पूर्णिमा का पवित्र पर्व है। हिंदू और सनातनी परंपराओं में यह दिन गुरुओं के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। आज हम आपको ले चलते हैं राजस्थान के पवित्र श्री आपेश्वर महादेव मंदिर, सेवाडिया, जहां इस पावन अवसर पर 36 कौम के भक्तों का जन सैलाब उमड़ा। भोलेनाथ के इस प्राचीन शैव मठ में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अनुपम संगम देखने को मिला।

श्री आपेश्वर महादेव मंदिर में गुरु पूर्णिमा का उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से गूंज उठा। विशेष रूप से महिलाओं ने शिवलिंग की पूजा-अर्चना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी, भोलेनाथ के चरणों में दीप जलाकर, फूल चढ़ाकर और मंत्रोच्चार के साथ सुख-शांति की कामना करती दिखीं। शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित कर भक्तों ने अपनी भक्ति प्रकट की। मंदिर का वातावरण ओम नमः शिवाय के जयकारों से गूंज उठा, मानो स्वयं भोलेनाथ अपने भक्तों के बीच विराजमान हों। यह नजारा था भक्ति और एकता का, जहां 36 कौम के लोग एक साथ भोलेनाथ की आराधना में लीन थे।
इस पावन अवसर पर मठ के गादीपति, परम पूज्य महंत श्री 1008 रतनभारती महाराज ने भक्तों को गुरु पूर्णिमा की महिमा का विस्तार से बोध कराया। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में गुरु के महत्व को समझने का अवसर है। गुरु वह दीपक हैं, जो अज्ञान के अंधेरे को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह दिन व्यास पूर्णिमा भी कहलाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों और पुराणों का संकलन कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य खजाना दिया। महंत जी ने भक्तों को गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करने और जीवन में सत्य, धर्म और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

श्री आपेश्वर महादेव मंदिर, सेवाडिया, एक प्राचीन शैव मठ है, जहां महान तपस्वी संतों ने अपनी साधना से सिद्धियां प्राप्त कीं। इस मठ में महंत गंगाभारती महाराज, कन्हैया भारती, केसरभारती जैसे संतों ने तपोमय जीवन जिया। वर्तमान में महंत श्री 1008 रतनभारती महाराज इस मठ के गादीपति हैं, और उनके शिष्य बालसंत रविंद्रभारती महाराज तपो-साधना में लीन हैं। यह मठ शैव मतालंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जो भक्ति और आध्यात्म का केंद्र रहा है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सेवाडिया मठ में मेला जैसा उत्सवमय माहौल था। मंदिर परिसर रंग-बिरंगे झंडों, फूलों की मालाओं और भक्ति भजनों से सजा था। भक्तों की भीड़ में उत्साह और श्रद्धा का अनोखा मेल देखने को मिला। इस अवसर पर तीन बार के सांसद देवजी पटेल, पंचायत समिति सदस्य भेरूपाल सिंह देवड़ा, फतेहसिंह देवड़ा, पूर्व सरपंच मसराराम सुथार, किसान संघ के सोमाराम चौधरी, व्यवसायी अजीत सुथार, पूर्व प्रधान हरजीराम देवासी, भाजपा नेता गमन देवासी, अर्जुनसिंह पाल, गणपतसिंह पाल, प्रोफेसर डॉ. भरत खटोणा, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष किशोर जोशी, लसुसिंह आजोदर, रुपसिंह आजोदर, राजुसिंह बड़गांव, हरिसिंह देवड़ा दहीपुर, खुमाराम चौधरी हिरपुरा, मुलाराम चौधरी धानोल, तलसाजी प्रजापत कुड़ा, अमृत जोशी, ओखाराम जोशी, परखाराम चौधरी आजोदर, फौजसिंह डाभी, प्रकाशसिंह, सोमाराम पुरोहित सेवाडिया, जयन्ति पुरोहित एलआईसी सेवाडिया, पुरणसिंह वकील, फुलसिंह जाखड़ी, महेन्द्रसिंह मेत्रीवाड़ा सहित कई सरपंच और गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने भोलेनाथ के दर्शन कर और महंत रतनभारती महाराज का आशीर्वाद प्राप्त कर इस पावन पर्व को यादगार बनाया।
गुरु पूर्णिमा का यह पर्व हमें सिखाता है कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है। श्री आपेश्वर महादेव मंदिर, सेवाडिया में आज का यह उत्सव भक्ति, एकता और आध्यात्म का प्रतीक बना। आइए, हम सब अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलें। जय भोलेनाथ! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।



