जसवंतपुरा उपखंड मुख्यालय स्थित नृपालदेव राजपूत छात्रावास परिसर में बुधवार, 11 जून को क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख और संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आयोजित सभा में सर्व समाज की भावपूर्ण उपस्थिति रही, जहां सभी ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वरसिंह देशु ने भगवान सिंह की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की। उपस्थित सभी लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और भावभीनी स्मृतियों के साथ उन्हें याद किया।
भगवान सिंह का स्वर्गवास 5 जून की रात 10:15 बजे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुआ था। वे 24 मई से उपचाराधीन थे। जैसे ही उनके निधन की सूचना फैली, पूरे देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। संघ कार्यालय जयपुर में रातभर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।

भगवान सिंह रोलसाहबसर का जन्म 2 फरवरी 1944 को फतेहपुर तहसील के रोलसाहबसर गांव में हुआ। बचपन में ही पितृछाया से वंचित हुए भगवान सिंह विद्यार्थी जीवन के दौरान तनसिंह के संपर्क में आए और उसी क्षण से उन्होंने अपना जीवन क्षत्रिय युवक संघ को समर्पित कर दिया।
1989 से 2021 तक संघ प्रमुख रहे भगवान सिंह ने संगठन में अभूतपूर्व विस्तार करते हुए बालिका, दम्पति, ब्रह्मचारी एवं व्यवसायिक वर्गों के शिविर, सद्भावना कार्यक्रमों का सफल संचालन किया। उन्होंने मातृशक्ति प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की, जिससे संघ में नारी सहभागिता को दिशा मिली।
श्रद्धांजलि सभा में ईश्वरसिंह देशु ने उन्हें तपस्वी ऋषि बताया और कहा कि अत्यंत अस्वस्थ होने के बावजूद भी वे 18 मई को उदयपुर में आयोजित उच्च प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि भगवान सिंह अपने जीवन का हर क्षण संघ को समर्पित करते रहे।
तहसीलदार नीरजा कुमारी ने कहा कि भगवान सिंह ने केवल क्षत्रिय समाज नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए कार्य किया। उनका संगठन सभी को साथ लेकर चलने वाला था।
दलपतसिंह उच्चतम ने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल और सभी प्रमुख राजनेता भगवान सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
महेंद्रपाल सिंह चैंकला ने बताया कि दिल्ली में आयोजित तनसिंह जन्मशताब्दी समारोह में पहली बार भगवान सिंह से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि भगवान सिंह ने संघ को राजस्थान से लेकर दक्षिण भारत तक पहुंचाया।
छैलसिंह उच्चमत ने भावुक शब्दों में कहा कि दीपक बुझने से पहले हजारों दीप जलाता है, और भगवान सिंह अपने जीवन में यही कर गए। अब हम सभी उनके विचारों को जीवन में उतारकर सच्ची श्रद्धांजलि देंगे।
कार्यक्रम में नीरजा कुमारी, देवेंद्रसिंह जाविया, दौलतसिंह कलापुरा, महेंद्रपालसिंह चेकला, देवीसिंह पादर, भंवरसिंह चेकला, दलपतसिंह उच्चतम, गोविन्दपाल सिंह गजापूरा, सवाईसिंह वाडा, छैलसिंह उच्चतम, रामसिंह धरुपरा, मुकाजी पुरोहित, छैलसिंह टुआ, चतरसिंह पुरण, भगवानसिंह चेकला, सुमेरसिंह राजीकवास, अचलसिंह जीतपुर, जनकसिंह डोरडा, जोगेंद्रसिंह गनपतदान चारण, सुरेंद्रसिंह रानीवाड़ा, डूंगरसिंह भाटी सहित अनेक स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा के अंत में सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि भगवान सिंह के दिखाए मार्ग पर चलकर संघ कार्य को आगे बढ़ाते रहेंगे।



