गायत्री सेवा समिति व वन विभाग की संयुक्त पहल, युवाओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग
रानीवाड़ा, 6 जुलाई।
गायत्री सेवा समिति, रानीवाड़ा व वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को “हरियालो राजस्थान: एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत सघन वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान वन विभाग कार्यालय के पास 800 से अधिक छायादार व फलदार पौधे लगाए गए।
बड़, पीपल, गुलर, करंज, जामुन, बादाम, चीकू, गुलमोहर, सहजन आदि पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजन में युवाओं और महिलाओं ने भी उत्साह से भाग लिया।

समिति अध्यक्ष कल्याण जोशी ने बताया कि संस्था पिछले दो वर्षों से पर्यावरण, पक्षी संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण हेतु सक्रिय है। इस बार लगाए गए पौधों की देखभाल के लिए पानी की टंकी व ड्रिप सिंचाई सिस्टम भी लगाने की योजना है।
प्रेरणा का स्रोत: सामूहिक प्रयास और नेतृत्व
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष कल्याण जोशी ने कहा, “हमारा उद्देश्य न केवल पेड़ लगाना है, बल्कि पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना और भावी पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा राजस्थान छोड़ना है।” कार्यक्रम में समिति के संरक्षक डॉ. किशन जोशी, भवरलाल जोशी, उपाध्यक्ष विजय जयंतीभाई जैन, बीसीएमओ डॉ. गणपतलाल चौधरी, जयंतीलाल पुरोहित, किशोर जोशी, भगराज पुरोहित सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और प्रेरणादायक बनाया।

समुदाय की भागीदारी: एक साझा संकल्प
कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। ग्रामीणों, विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा। डॉ. गणपतलाल चौधरी ने कहा, “यह अभियान न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और पशु-पक्षियों के लिए भी जरूरी है। गायत्री सेवा समिति का यह प्रयास सराहनीय है।
“पर्यावरण संरक्षण का संदेश
यह आयोजन न केवल वृक्षारोपण तक सीमित रहा, बल्कि इसने स्थानीय समुदाय को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होने का संदेश भी दिया। गायत्री सेवा समिति की यह पहल अन्य संगठनों और समुदायों के लिए एक प्रेरणा बन रही है। समिति ने भविष्य में और अधिक गांवों में वृक्षारोपण और पक्षी संरक्षण के लिए कार्य करने का संकल्प दोहराया।
गायत्री सेवा समिति और वन विभाग का यह संयुक्त प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर है। ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण वैश्विक चुनौतियां बन चुके हैं, रानीवाड़ा जैसे छोटे कस्बों से उठने वाली यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार और समुदाय को मिलकर ऐसे प्रयासों को और बढ़ावा देना चाहिए ताकि हमारा राजस्थान हरा-भरा और समृद्ध बना रहे।



