मुख्य बिंदु:
- देसी गाय के अस्तित्व पर खतरा: सांसद ने चेताया, 10 साल में लुप्त हो सकती है भारतीय नस्ल
- दूध के दाम पर दो-टूक: शहर में 80 रुपये, तो किसान को 30 क्यों? लाभकारी मूल्य की मांग
- आपदा प्रबंधन: अकाल-बाढ़ में पशुओं को बचाने के लिए ‘चारा बैंक’ बनाने का प्रस्ताव
नई दिल्ली/सिरोही। जालोर-सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी ने संसद में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘गौमाता’ और ‘किसान’ के संरक्षण के लिए एक साथ तीन प्राइवेट मेंबर बिल (विधेयक) पेश कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भारतीय नस्ल की गायें इतिहास बन जाएंगी और किसान आर्थिक बोझ तले दब जाएगा।
लोकसभा में सांसद चौधरी ने निम्नलिखित तीन प्रमुख विधेयक पेश किए:
- स्वदेशी गौ और गौ-संतती संरक्षण बोर्ड विधेयक, 2024
- चारा भंडारण बोर्ड विधेयक, 2025
- दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद लाभकारी मूल्य विधेयक, 2025
“देसी गाय का दूध कैंसरनाशक, फिर भी अस्तित्व खतरे में” विधेयक पेश करते हुए सांसद चौधरी ने सदन में चिंता व्यक्त की कि जिस तेजी से देसी गायों की संख्या घट रही है, अगले 10 वर्षों में इनके लुप्त होने का खतरा है। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा, “देसी गाय का दूध केवल आहार नहीं, बल्कि अमृत है। इसमें पाया जाने वाला ए-2 (A2) विटामिन कैंसरनाशक है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। गौमूत्र में 24 ऐसे तत्व हैं जो असाध्य रोगों को ठीक करते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि गाय हमारी धर्म-संस्कृति ही नहीं, बल्कि जैविक खेती और जमीन की उर्वरा शक्ति का आधार भी है।
दूध उत्पादन: “मेहनत किसान की, मलाई बिचौलियों की” सांसद ने दुग्ध उत्पादकों की पीड़ा रखते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है (10.2 करोड़ टन वार्षिक), लेकिन इसका लाभ किसान को नहीं मिल रहा। उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा, “बाजार में उपभोक्ता 70 से 80 रुपये लीटर दूध खरीदता है, लेकिन किसान को मात्र 30 से 40 रुपये मिलते हैं। ऊपर से सर्दियों में जब उत्पादन बढ़ता है, तो डेयरियां दूध लेने से मना कर देती हैं।” सांसद ने मांग की कि दूध और दुग्ध उत्पादों का लाभकारी मूल्य तय होना चाहिए ताकि 7 करोड़ ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
चारा संकट: “पशु कसाई के पास न जाए, इसलिए बने चारा बैंक” प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पशुधन की दुर्दशा पर सांसद ने ‘चारा भंडारण बोर्ड’ के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अकाल, सूखा या बाढ़ के समय इंसान को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन बेजुबान पशु चारे-पानी के अभाव में दम तोड़ देते हैं या किसान मजबूरी में उन्हें मांस विक्रेताओं को औने-पौने दाम में बेच देता है। सांसद ने मांग की कि देश में ‘चारा बैंक’ स्थापित किए जाएं, ताकि संकट के समय प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत चारा और पानी पहुँचाया जा सके और गोवंश की रक्षा हो सके।



