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सांचौर/जालौर: रबी सीजन सिर पर है और सरहदी इलाकों में नर्मदा की वितरिकाएं धूल फांक रही हैं। एक तरफ इंद्रदेव की बेरुखी और दूसरी तरफ नर्मदा परियोजना प्रशासन की लचर कार्यशैली—किसान इस वक्त दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। हालात यह हो गए हैं कि फसलों की सिंचाई तो दूर, ढाणियों में मवेशियों और इंसानों के हलक तर करने तक का संकट गहरा गया है। इसी बदहाली के खिलाफ नर्मदा नहर डिग्गी किसान यूनियन द्वारा 1 अक्टूबर को प्रस्तावित विशाल धरने को लेकर अब किसान लामबंद होने लगे हैं। विभिन्न किसान संगठनों ने एक सुर में इस आंदोलन को खुला समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।
संयुक्त किसान मोर्चा सांचौर के जिला मंत्री मकारम चौधरी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नर्मदा नहर की लचर और बदहाल व्यवस्था से आज हर काश्तकार त्रस्त है। 1 अक्टूबर को भारी तादाद में किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने पहुंचेंगे।
वहीं राजस्थान किसान सभा के जिला अध्यक्ष विरदसिंह चौहान ने दो टूक कहा कि मुख्य नहर व वितरिकाओं में पानी की भारी किल्लत से पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। किसान सभा की सभी ग्राम इकाइयों के कार्यकर्ता और ग्रामीण बड़ी संख्या में इस धरने में शामिल होकर प्रशासन की नींद उड़ाएंगे।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष रिड़मलसिंह गुंदाऊ ने भी रोष जाहिर करते हुए कहा कि बुवाई का वक्त आ चुका है, लेकिन बेपरवाह प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया है।
इस आंदोलन को धार देने के लिए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अध्यक्ष धीमाराम खिलेरी, अनकमाण्ड किसान संघर्ष समिति (हेमागुड़ा) के अध्यक्ष दीपाराम साहू, अनकमाण्ड किसान संघर्ष समिति (मेघावा) के अध्यक्ष जगदीश सियाक और भारतमाला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगाराम चौधरी ने भी किसानों से एकजुट होकर भारी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है।
दोपहर 12 बजे बजेगा बिगुल
डिग्गी किसान यूनियन के अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई ने बताया कि 1 अक्टूबर को दोपहर ठीक 12 बजे नर्मदा परियोजना कार्यालय के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने क्षेत्र के सभी डिग्गी अध्यक्षों, वितरिका अध्यक्षों और किसानों से समय पर पहुंचकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की है।












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